आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि विश्व व्यापार संगठन में सबकी सहमति से होने वाली निर्णय प्रक्रिया, सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) नियम और विशेष एवं अलग व्यवहार वैश्विक व्यापार में संतुलन सुनिश्चित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मूलभूत सिद्धांतों को बनाए रखने की आवश्यकता बतायी।
मंत्री ने कैमरून के याउंडे में चल रहे डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के दौरान नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे और ब्रिटेन के व्यापार नीति राज्य मंत्री क्रिस ब्रायंट के साथ हुई अपनी बैठक में ये बातें कहीं। ये दोनों डब्ल्यूटीओ में सुधारों के लिए सुविधाकर्ताओं की भी भूमिका निभा रहे हैं।
गोयल ने सुधार, प्रासंगिक और प्रभावी डब्ल्यूटीओ के लिए भारत के पूर्ण समर्थन को दोहराया।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर लिखा, “संगठन के मूलभूत सिद्धांतों, विशेष रूप से सर्वसम्मति आधारित निर्णय प्रक्रिया, एमएफएन नियम आधारित व्यापार और विशेष एवं अलग व्यवहार को बनाए रखना जरूरी है, जो वैश्विक व्यापार में समानता और संतुलन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।’’
चार दिवसीय मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (एमसी) 29 मार्च को समाप्त होगा। मंत्रिस्तरीय सम्मेलन डब्ल्यूटीओ का निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय है। इसकी बैठक हर दो साल में होती है।
विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) जिनेवा स्थित 166 सदस्यीय निकाय है जो वैश्विक व्यापार संबंधी मुद्दों का निपटान करता है। यह सदस्य देशों के बीच विवादों का निपटारा भी करता है। भारत 1995 से इसका सदस्य है।
डब्ल्यूटीओ सुधार विकसित देशों, विशेष रूप से अमेरिका द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा एक प्रमुख एजेंडा है। भारत इसका समर्थन कर रहा है। लेकिन उसने कहा है कि संगठन के मूल सिद्धांतों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
डब्ल्यूटीओ का संचालन इसके सदस्य देशों की सरकारों द्वारा किया जाता है। सभी प्रमुख निर्णय सदस्य देशों द्वारा सामूहिक रूप से लिए जाते हैं। ये निर्णय या तो मंत्रियों द्वारा (जिनकी बैठक कम से कम हर दो साल में एक बार होती है) या उनके राजदूतों या प्रतिनिधियों द्वारा (जिनकी नियमित बैठक जिनेवा में होती है) लिए जाते हैं। निर्णय सामान्यतः सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।