चार सैनी भाइयों ने लिखी मोहब्बत की मिसाल, ईदगाह के लिए दी जमीन

Story by  अशफाक कायमखानी | Published by  [email protected] | Date 29-03-2026
Four Saini Brothers Set a Shining Example of Love: Donate Land for an Eidgah
Four Saini Brothers Set a Shining Example of Love: Donate Land for an Eidgah

 

अशफाक कायमखानी/सीकर  (राजस्थान)

राजस्थान की रेतीली धरती अपनी बहादुरी के साथ-साथ बड़े दिल और आपसी भाईचारे के लिए भी जानी जाती है। आज के दौर में जहां अक्सर समाज को बांटने वाली खबरें सुर्खियां बनती हैं वहीं सीकर जिले के गुहाला गांव से एक ऐसी खबर आई है जो भारत की गंगा-जमुनी तहजीब की असली तस्वीर पेश करती है। यहां के चार हिंदू भाइयों ने सांप्रदायिक सौहार्द की एक बेमिसाल इबारत लिखते हुए ईदगाह के निर्माण के लिए अपनी लाखों की कीमती जमीन मुस्लिम समुदाय को दान कर दी है।

dसीकर जिले की नरसिंह पुरी पंचायत के तहत आने वाली सवावाली ढाणी में रहने वाले मुस्लिम परिवार लंबे समय से एक बड़ी समस्या का सामना कर रहे थे। गांव में ईदगाह के लिए अपनी कोई जमीन नहीं थी। इस कारण ईद और बकरीद जैसे बड़े त्योहारों पर नमाज पढ़ने के लिए जगह कम पड़ जाती थी। लोग एक छोटी सी मस्जिद में सिमटकर इबादत करने को मजबूर थे। गांव के हिंदू भाइयों को जब पड़ोसियों की इस तकलीफ का अहसास हुआ तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के मदद का हाथ बढ़ाया।

माली समाज से ताल्लुक रखने वाले चार सगे भाइयों लक्ष्मण राम सैनी, भोपाल राम सैनी, पूरणमल सैनी और जगदीश सैनी ने बड़ा दिल दिखाते हुए अपनी बेशकीमती जमीन ईदगाह के लिए देने का फैसला किया। जमीन की कीमत बाजार में लाखों रुपये है लेकिन इन भाइयों के लिए आपसी मोहब्बत की कीमत उस जमीन से कहीं ज्यादा थी।

ईद के मुकद्दस मौके पर जब इस जमीन का औपचारिक दान हुआ तो पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ईद की नमाज अदा करने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने चारों सैनी भाइयों और उनके परिवार का माला पहनाकर स्वागत किया।

गांव के बुजुर्गों ने भावुक होते हुए कहा कि यह सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए मोहब्बत का एक पुल है। इस नेक काम को सालों साल याद रखा जाएगा। वहां मौजूद लोगों का कहना था कि जब देश के कुछ हिस्सों में विवाद की खबरें आती हैं तब गुहाला जैसे गांवों से आने वाली ऐसी कहानियां सुकून देती हैं। यह इस बात का सबूत है कि ग्रामीण भारत में आज भी इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।

दिलचस्प बात यह है कि शेखावाटी क्षेत्र में जमीन दान करने की यह परंपरा काफी पुरानी है। चाहे स्कूल बनाना हो या अस्पताल या फिर धार्मिक स्थल यहां के लोगों ने कभी भी मजहब की दीवार को बीच में नहीं आने दिया। इसी कड़ी में पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने भी झुंझुनू में नमाज के दौरान मौजूद रहकर सद्भावना का संदेश दिया।

इतिहास गवाह है कि इसी शेखावाटी के फतेहपुर और बेसवा गांव में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सरकारी स्कूल और अस्पतालों के लिए अपनी कीमती जमीनें दान की थीं। आज वहां शानदार गर्ल्स कॉलेज और अस्पताल चल रहे हैं जिससे हर जाति और धर्म की बेटियां शिक्षा पा रही हैं। वहीं लाडनूं के पास लेड़ी गांव में एक मुस्लिम शख्स द्वारा माताजी का मंदिर बनवाना भी इसी साझा संस्कृति का हिस्सा है।

आज जब सोशल मीडिया पर नफरत भरी बातें तेजी से फैलती हैं तब लक्ष्मण राम, भोपाल राम, पूरणमल और जगदीश सैनी जैसे लोग असल भारत का चेहरा बनकर उभरते हैं। इन भाइयों ने साबित कर दिया है कि भारत की आत्मा उसकी विविधता और एकता में ही बसती है।

गुहाला गांव की यह ईदगाह अब सिर्फ इबादत की जगह नहीं रहेगी बल्कि यह उन चार भाइयों के त्याग और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में हमेशा खड़ी रहेगी। राजस्थान के इस छोटे से गांव ने पूरे देश को यह संदेश दिया है कि अगर हम एक-दूसरे की जरूरतों को समझना शुरू कर दें तो किसी भी विवाद के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। गंगा-जमुनी तहजीब किसी किताब का शब्द नहीं बल्कि जमीन पर दिखने वाली हकीकत है।