एहसान फाजली/श्रीनगर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत सहित वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह बाधित कर दिया है। इसके चलते जम्मू-कश्मीर में ईंधन और एलपीजी (LPG) का स्टॉक खत्म होने की खबरों से दहशत फैल गई है। कश्मीर के लोग अक्सर ऐसी स्थितियों का सामना करते रहे हैं, लेकिन इस बार डर की वजह आंतरिक कानून-व्यवस्था या श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग की बंदी नहीं, बल्कि बाहरी परिस्थितियाँ हैं।
इस संकट की शुरुआत 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के साथ हुई, जो दुनिया के लिए ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। माना जा रहा है कि यह स्थिति कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र को एक और गहरा जख्म देने वाली है। साल 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने और तीन दशकों के उग्रवाद के बाद, कश्मीर का पर्यटन 2022 से 2024 तक लगातार तीन वर्षों तक सुधार की राह पर था और हर साल पर्यटकों की संख्या बढ़ रही थी।

लेकिन पिछले साल पर्यटन सीजन की शुरुआत में ही पहला झटका लगा। 22अप्रैल 2025को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय खच्चर वाले की मौत हो गई। इस घटना के कारण गर्मियों की छुट्टियों के पीक सीजन से हफ्तों पहले ही पर्यटकों का आना अचानक बंद हो गया।
पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 89पर्यटन स्थलों को बंद करने का आदेश दिया, जिन्हें बाद में धीरे-धीरे खोला गया। इन पाबंदियों ने होटल व्यवसायियों, हाउसबोट मालिकों, ट्रांसपोर्टरों और हस्तशिल्प क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया।
पहलगाम की घटना के ठीक दो महीने बाद, बाजारों और होटलों में खराब मांस की आपूर्ति की खबरों ने रेस्टोरेंट कारोबार को एक और चोट पहुँचाई। कश्मीर के एक होटल व्यवसायी ने बताया, "लंबे समय बाद पर्यटकों की संख्या में उत्साहजनक सुधार दिख रहा था, लेकिन इन दो घटनाओं ने पिछले साल सब बिगाड़ दिया।" उन्होंने आगे कहा कि इस साल बेहतर सीजन की उम्मीद थी, लेकिन गर्मियों की शुरुआत में ही पश्चिम एशिया के युद्ध ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। ईंधन और एलपीजी की कथित "किल्लत" के कारण पर्यटकों की संख्या पहले ही कम होने लगी है, हालांकि प्रशासन का दावा है कि अगले दो-तीन हफ्तों के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
सूत्रों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को छोड़कर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति सीमित कर दी गई है। इससे होटलों की सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है। एक होटल मालिक ने बताया कि गैस की कमी के कारण कई होटलों ने अपना मेनू छोटा कर दिया है और अगर हालात नहीं सुधरे तो सेवाएं पूरी तरह रोकनी पड़ सकती हैं।

मंगलवार (24 मार्च 2026 ) को मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में कहा गया कि केंद्र शासित प्रदेश में स्टॉक की स्थिति "स्थिर" है। सरकारी बयान के अनुसार, पेट्रोल का स्टॉक 9-10दिन, डीजल 16-17दिन और एलपीजी 12-13दिनों के लिए पर्याप्त है। घरेलू एलपीजी की मांग 100%पूरी की जा रही है और शहरी क्षेत्रों में 24दिन व ग्रामीण क्षेत्रों में 35दिनों का बैकअप मौजूद है।
दूसरी ओर, कश्मीर एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने डिविजनल कमिश्नर से मुलाकात कर वितरण में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए कुछ रियायतें मांगीं। एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन सिंह रैना ने बताया कि लोग घबराहट में एडवांस बुकिंग कर रहे हैं जिससे मांग बढ़ गई है। उन्होंने कहा, "ज्यादातर घरों में पहले से ही 5-6सिलेंडर का स्टॉक होता है, लेकिन किल्लत के डर से लोग उन्हें भी भरकर रखना चाहते हैं।"
पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग अब डरे हुए हैं कि इस स्थिति का आने वाले सीजन पर क्या असर पड़ेगा। इस साल पर्यटन सीजन की आधिकारिक शुरुआत 14मार्च को 'बादाम वारी' और 16मार्च को ट्यूलिप गार्डन के उद्घाटन के साथ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने की थी। पिछले साल पर्यटकों की संख्या गिरकर 11.16लाख रह गई थी।

कोविड-19 के बाद कश्मीर में पर्यटकों की संख्या ने रिकॉर्ड तोड़ा था। 2021 में जहाँ सिर्फ 6.66 लाख पर्यटक आए थे, वहीं 2022 में यह संख्या 26.74 लाख, 2023 में 31.56 लाख और 2024 में अपने उच्चतम स्तर 34.55 लाख तक पहुँच गई थी। बागवानी और हस्तशिल्प के बाद पर्यटन कश्मीर की अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिससे करीब पांच लाख लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है।