Chinese technology and investment welcome, caution needed in opening up trade: CII President
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के नवनियुक्त अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने कहा है कि भारत में चीन के निवेश एवं प्रौद्योगिकी का स्वागत है, लेकिन उसके साथ व्यापार खोलने के मामले में देश को सतर्क और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग को चीन पर आयात निर्भरता कम करने और देश में ही विनिर्माण बढ़ाने के उपाय खोजने चाहिए।
आर. मुकुंदन ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘इस विषय पर विभिन्न पक्षों की मिली-जुली राय रही है, लेकिन मैं यह कहूंगा कि चीन से निवेश तथा प्रौद्योगिकी का स्वागत है। हालांकि, खुले व्यापार के मामले में हमें बहुत सावधानी और संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।’’
भारत के चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर विचार करने से जुड़े सवाल पर उन्होंने यह बात कही।
चीन वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया। इस दौरान द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर रहा।
गत वित्त वर्ष में चीन को भारत का निर्यात 36.66 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.63 अरब डॉलर रहा। इस तरह व्यापार घाटा 2024-25 के 99.2 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर हो गया।
भारत पहले 16 सदस्यीय क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) समूह का हिस्सा था, लेकिन नवंबर, 2019 में इससे बाहर हो गया। आरसीईपी में 10 आसियान देश और चीन शामिल हैं।
मुकुंदन ने कहा कि जिन क्षेत्रों में भारतीय कंपनियां चीन के साथ सहयोग बढ़ा सकती हैं उनमें बैटरी भंडारण, वाहन बैटरियों, सेमीकंडक्टर में उपयोग होने वाले विशेष रसायन तथा अन्य उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्र शामिल हैं।
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर उन्होंने कहा कि अमेरिका, भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे बड़ा बाजार है और यह समझौता इसे और मजबूत करेगा।
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत जारी है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर इस संबंध में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत करने के लिए भारत आए हैं।