Children's picture books reflect changing attitudes towards languages and help revive them
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
शोध से यह बात अच्छी तरह सामने आई है कि बच्चों की चित्र वाली पुस्तकें भाषा सीखने में मदद करती हैं।
म्यूनिख स्थित ‘इंटरनेशनल यूथ लाइब्रेरी’ में एक शोधवृत्ति के दौरान मुझे यह अध्ययन करने का अवसर मिला कि चित्र वाली बहुभाषी पुस्तकों में अलग-अलग भाषाओं को किस तरह प्रस्तुत किया जाता है और उनका इस्तेमाल किसी समाज में उन भाषाओं की बदलती स्थिति को किस तरह प्रतिबिंबित कर सकता है।
न्यूजीलैंड के संदर्भ में यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि 1970 के दशक से बच्चों की चित्र वाली पुस्तकों में ‘ते रेओ माओरी’ (माओरी लोगों की पारंपरिक और आधिकारिक भाषा) के इस्तेमाल में लगातार वृद्धि हुई है। यह भाषा को फिर से उसका स्थान दिलाने और उसके पुनर्जीवन की प्रक्रिया को दर्शाता है। मेरा मानना है कि चित्र वाली पुस्तकें भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
‘यूथ लाइब्रेरी’ में अपने अध्ययन के दौरान मैंने चित्र वाली जिन पुस्तकों का विश्लेषण किया, उनमें एक ही पुस्तक में 11 तक भाषाएं शामिल थीं। ये पुस्तकें दक्षिण अफ्रीका, पोलैंड और नॉर्वे समेत कई देशों की थीं।