मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स बोले-संविधान ‘मज़बूत और अडिग’, अहम सुप्रीम कोर्ट फ़ैसलों से पहले भरोसे का संदेश

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 01-01-2026
Chief Justice John Roberts said the Constitution is
Chief Justice John Roberts said the Constitution is "strong and enduring," sending a message of reassurance ahead of key Supreme Court decisions.

 

वॉशिंगटन।

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा है कि देश का संविधान आज भी उतना ही मज़बूत और अडिग है, जितना पहले था। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी न्यायिक व्यवस्था एक उथल-पुथल भरे वर्ष से गुज़री है और 2026 में सुप्रीम कोर्ट के सामने कई बड़े और निर्णायक मामले आने वाले हैं।

न्यायपालिका को संबोधित अपनी वार्षिक चिट्ठी में जॉन रॉबर्ट्स ने अमेरिका के संस्थापक दस्तावेज़ों की मजबूती पर ज़ोर दिया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज के एक सदी पुराने कथन का हवाला देते हुए लिखा कि संविधान “तब भी अडिग था और आज भी वैसा ही है।” रॉबर्ट्स ने कहा कि यह बात पहले भी सच थी और आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

यह पत्र ऐसे साल के बाद आया है, जब कई कानूनी विशेषज्ञों और डेमोक्रेट नेताओं ने संभावित संवैधानिक संकट की आशंका जताई थी। दरअसल, रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने उन अदालती फ़ैसलों का विरोध किया था, जिनसे ट्रंप के दूरगामी रूढ़िवादी एजेंडे की रफ़्तार धीमी हुई। इसी दौरान जॉन रॉबर्ट्स को भी एक असाधारण हस्तक्षेप करना पड़ा था, जब ट्रंप ने वेनेज़ुएला के कथित गिरोह सदस्यों के निर्वासन से जुड़े एक मामले में उनके ख़िलाफ़ फ़ैसला देने वाले जज के महाभियोग की मांग की थी। रॉबर्ट्स ने तब न्यायपालिका की स्वतंत्रता का बचाव करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

अपने ताज़ा पत्र में मुख्य न्यायाधीश ने मुख्य रूप से अमेरिकी न्यायिक इतिहास पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने उन्नीसवीं सदी की शुरुआत के एक अहम मामले का उल्लेख किया, जिसने यह सिद्धांत स्थापित किया था कि विवादास्पद फ़ैसलों के आधार पर कांग्रेस को जजों को हटाने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

हालांकि निचली अदालतों में ट्रंप प्रशासन को कई मामलों में झटका लगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की आपातकालीन डॉकेट में उसे लगभग दो दर्जन मामलों में राहत मिली। अदालत के रूढ़िवादी बहुमत ने ट्रंप को ट्रांसजेंडर लोगों की सेना में भर्ती पर रोक लगाने, कांग्रेस द्वारा स्वीकृत अरबों डॉलर की फंडिंग वापस लेने, आव्रजन पर सख़्त कदम उठाने और स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के प्रमुखों को हटाने की अनुमति दी।

इसके बावजूद, पिछले वर्ष अदालत ने ट्रंप को कुछ मामलों में हार भी दी, जिनमें अमेरिकी शहरों में नेशनल गार्ड की तैनाती का उनका प्रयास शामिल है। 2026 में सुप्रीम कोर्ट के सामने और भी अहम मुद्दे आने वाले हैं, जिनमें जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की ट्रंप की कोशिश और यह सवाल शामिल है कि क्या राष्ट्रपति एकतरफ़ा तौर पर सैकड़ों देशों पर टैरिफ लगा सकते हैं।

जॉन रॉबर्ट्स की चिट्ठी में इन विवादास्पद मुद्दों का सीधा ज़िक्र कम था। उन्होंने अपने पत्र की शुरुआत 1776 में प्रकाशित ऐतिहासिक पर्चे ‘कॉमन सेंस’ से की, जिसे ब्रिटेन के उत्तरी अमेरिकी उपनिवेशों में आए लेखक थॉमस पेन ने लिखा था। पत्र के अंत में उन्होंने एक बार फिर कूलिज के शब्दों को दोहराते हुए कहा कि तीखी दलगत राजनीति के बीच संविधान और स्वतंत्रता की घोषणा ही देश के लिए सबसे बड़ा संबल हैं।