नई दिल्ली।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) दिवस के अवसर पर संगठन से जुड़े वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों की “अटूट प्रतिबद्धता, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय कर्तव्यबोध” की सराहना करते हुए कहा कि स्वदेशी तकनीकों का विकास भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मज़बूत कर रहा है।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा अपने संदेश में रक्षा मंत्री ने लिखा कि डीआरडीओ द्वारा विकसित की जा रही स्वदेशी और भविष्य के लिए तैयार रक्षा तकनीकें न केवल देश की रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ कर रही हैं, बल्कि सशस्त्र बलों के आत्मविश्वास को भी नई मजबूती दे रही हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को रक्षा क्षेत्र में साकार करने में डीआरडीओ की भूमिका बेहद अहम है। राजनाथ सिंह ने पूरे डीआरडीओ परिवार को नवाचार, सार्थक उपलब्धियों और राष्ट्र सेवा से भरे वर्ष की शुभकामनाएं भी दीं।
1 जनवरी 2026 को डीआरडीओ ने अपना 67वां स्थापना दिवस मनाया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, डीआरडीओ की स्थापना वर्ष 1958 में भारतीय सेना के तकनीकी विकास प्रतिष्ठानों, तकनीकी विकास एवं उत्पादन निदेशालय और रक्षा विज्ञान संगठन के एकीकरण से हुई थी। शुरुआती दौर में यह महज 10 प्रयोगशालाओं वाला एक छोटा संगठन था, लेकिन समय के साथ यह विषयों की विविधता, प्रयोगशालाओं की संख्या, तकनीकी उपलब्धियों और वैश्विक प्रतिष्ठा के लिहाज से एक बहुआयामी और सशक्त संस्था बन चुका है।
इस अवसर पर जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने भी डीआरडीओ के सभी कर्मियों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं। भारतीय सेना की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि डीआरडीओ का योगदान देश की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में लगातार निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
वर्ष 2025 में डीआरडीओ ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज कीं। इनमें हाल ही में ओडिशा तट के पास चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से स्वदेशी ‘प्रलय’ मिसाइल का सफल परीक्षण शामिल है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बुधवार सुबह लगभग 10:30 बजे एक ही लॉन्चर से कम समय में दो ‘प्रलय’ मिसाइलों का सल्वो लॉन्च किया गया, जो उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों का हिस्सा था। दोनों मिसाइलों ने निर्धारित पथ का पालन किया और सभी उड़ान उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
‘प्रलय’ एक स्वदेशी, ठोस ईंधन से संचालित, क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसमें अत्याधुनिक गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम लगाए गए हैं। यह मिसाइल उच्च सटीकता के साथ विभिन्न प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है और कई तरह के लक्ष्यों को भेद सकती है।
कुल मिलाकर, डीआरडीओ दिवस पर दिए गए संदेशों और हालिया सफलताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वदेशी रक्षा अनुसंधान और तकनीक के दम पर भारत न केवल अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती से स्थापित कर रहा है।






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