नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महिला उद्यमियों और महिलाओं के नेतृत्व वाले कारोबार के लिए अधिक अवसर पैदा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि महिला उद्यमियों को आगे बढ़ाने के लिए कर्ज, बाजार और कारोबार के स्पष्ट एवं भरोसेमंद नियमों तक आसान पहुंच जरूरी है।
नई दिल्ली में बुधवार को आयोजित ब्रिक्स डब्ल्यूबीए महिला नेतृत्व विकास सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि किसी भी उद्यमी के लिए अंतरराष्ट्रीय कारोबार में प्रवेश के रास्ते में तीन बड़ी चुनौतियां होती हैं। पहली है वित्त और कर्ज तक पहुंच। दूसरी खरीदारों और बाजारों तक पहुंच। तीसरी कारोबार के लिए ऐसे नियमों की उपलब्धता है, जो स्पष्ट और भरोसेमंद हों।
गोयल ने कहा कि भारत महिला उद्यमियों के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के अपने अनुभवों को ब्रिक्स महिला व्यापार गठबंधन और व्यापक ब्रिक्स कारोबारी सहयोग के साथ साझा करना चाहता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के साथ शिक्षा, कौशल और जीवन की गुणवत्ता में सुधार पर विशेष ध्यान दिया है। इसका उद्देश्य महिलाओं को देश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख भागीदार बनाना है।
महिलाओं की वित्तीय भागीदारी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि करीब 12 साल पहले ग्रामीण भारत में बड़ी संख्या में महिलाओं के पास बैंक खाते, अपने नाम पर संपत्ति या क्रेडिट हिस्ट्री नहीं थी। ऐसे में उन्हें कर्ज मिलना भी मुश्किल था।
गोयल के मुताबिक, इसके बाद भारत ने महिलाओं के नाम पर घर उपलब्ध कराने, करीब 30 करोड़ बैंक खाते खोलने और बिना किसी गारंटी के कर्ज उपलब्ध कराने जैसी पहल की। इसका लाभ उन महिलाओं को भी मिला, जिनका पहले कोई क्रेडिट इतिहास नहीं था।
उन्होंने बताया कि आज करीब 10 करोड़ ग्रामीण महिलाएं 90 लाख स्वयं सहायता समूहों, छोटे सहकारी संगठनों या अलग-अलग कारोबार से जुड़े महिला समूहों का हिस्सा हैं।
गोयल ने कहा कि व्यक्तिगत आय के तौर पर सालाना एक लाख रुपये से अधिक कमाने वाली महिलाओं की संख्या अब 3 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। इन महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि भारत आने वाले समय में न केवल ऐसी महिलाओं की संख्या बढ़ाना चाहता है, बल्कि उनकी आय में भी लगातार वृद्धि करना चाहता है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि छोटे कारोबार शुरू करने वाले उद्यमियों को अब तक करीब 56 करोड़ ऋण दिए गए हैं। इनमें 68 प्रतिशत से अधिक ऋण महिला उद्यमियों को मिले हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि उन्हें अपनी जरूरतों के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर न रहना पड़े। जब महिलाएं आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ी होती हैं तो वे देश की आर्थिक विकास की गति को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
गोयल ने कहा कि करीब एक दशक पहले भारत में महिला श्रम भागीदारी लगभग 19 प्रतिशत थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि आय के स्तर में वृद्धि, बेहतर शिक्षा, कौशल विकास और प्रतिभाओं को अवसर मिलने के साथ यह आंकड़ा बढ़कर 50 प्रतिशत या उससे अधिक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि विकसित समाजों में औपचारिक कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। भारत में भी अधिक महिलाओं के औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ने पर आर्थिक विकास में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
गोयल ने कहा कि सरकार का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि कारोबार शुरू करने या परिवार की आय में योगदान देने के इच्छुक हर व्यक्ति को समान अवसर और जरूरी संसाधन मिलें। उन्होंने इसे केवल महिला विकास नहीं, बल्कि महिला नेतृत्व वाले विकास की अवधारणा बताया।
गोयल ने कहा कि किसी महिला को शिक्षित या कुशल बनाने का लाभ केवल उसे नहीं मिलता, बल्कि पूरे परिवार को मिलता है। शिक्षित और सक्षम महिला अपने परिवार को बेहतर दिशा दे सकती है और बच्चों के भविष्य को मजबूत बनाने में योगदान कर सकती है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के विकास और महिला नेतृत्व वाले विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं में महिलाओं को केवल लाभार्थी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्हें नए भारत की निर्माता के रूप में देखना जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच की चर्चा करते हुए गोयल ने पिछले महीने जयपुर में हुई ब्रिक्स वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रियों की बैठक का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बैठक में छोटे निर्यातकों के आकलन के लिए स्वैच्छिक सिद्धांतों पर सहमति बनी थी।
उन्होंने कहा कि किसी छोटे उद्यमी का आकलन केवल उसके चालान और भुगतान के आधार पर नहीं होना चाहिए। उसके कौशल, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।
गोयल ने कहा कि विदेशी व्यापार को केवल गारंटी या संपार्श्विक आधारित कारोबार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह समाजों और कारोबारों को जोड़ने तथा उन वर्गों के लिए नए अवसर पैदा करने का माध्यम होना चाहिए, जो शायद कभी विदेशों में अपना कारोबार पहुंचाने की कल्पना भी नहीं कर पाते।
उन्होंने बताया कि जयपुर सहमति में ब्रिक्स देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक साझा ब्रिक्स प्लेटफॉर्म तलाशने पर भी सहमति जताई है। इससे उद्यमियों के सामने मौजूद दूसरी बड़ी चुनौती यानी खरीदारों और बाजारों तक पहुंच आसान हो सकती है।
गोयल ने कहा कि साझा ब्रिक्स व्यापार मंच तैयार होने के बाद किसी एक सदस्य देश में किसी उत्पाद की जरूरत पैदा होने पर दूसरे सदस्य देशों के उद्यमियों को भी इसकी जानकारी मिल सकेगी।
इसी तरह प्लेटफॉर्म पर कारोबार से जुड़े चालान और अन्य जानकारी साझा की जा सकती है। इससे वित्तीय संस्थानों और अन्य वित्तीय मध्यस्थों को भी मंच से जुड़ने का अवसर मिलेगा। वे महिला उद्यमियों और छोटे कारोबारियों को व्यापार बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करा सकेंगे।
गोयल ने ब्रिक्स देशों से महिला स्वामित्व वाले कारोबारों को अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, सम्मेलनों, सेमिनारों और कारोबारी मंचों में अधिक भागीदारी का अवसर देने की अपील की।
उन्होंने सुझाव दिया कि ब्रिक्स देश अलग-अलग क्षेत्रों के लिए विशेष महिला व्यापार प्रतिनिधिमंडल तैयार कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर उन्होंने पूरी तरह महिला प्रतिनिधियों वाले कपड़ा कारोबार प्रतिनिधिमंडल का जिक्र किया, जो एक ब्रिक्स देश से दूसरे देश की यात्रा कर सके।
उनके मुताबिक, ऐसे प्रतिनिधिमंडलों से महिलाओं को नए बाजारों से जुड़ने का मौका मिलेगा। साथ ही अलग-अलग देशों की मूल्य श्रृंखलाओं को जोड़ने में भी मदद मिलेगी।
व्यापार के लिए स्पष्ट और भरोसेमंद नियमों की जरूरत पर गोयल ने कहा कि पर्याप्त निश्चितता के बिना कारोबार नहीं चल सकता। इसके लिए खुले बाजार, खुली सीमाएं और मुक्त व्यापार को प्रोत्साहित करने वाला वातावरण जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सभी ब्रिक्स सदस्य देशों ने विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने और उसकी रक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे कम विकसित और विकासशील देशों को अपनी नीतियां बनाने के लिए जरूरी अवसर मिल सकते हैं।
गोयल ने ब्रिक्स देशों के बीच इलेक्ट्रॉनिक व्यापार दस्तावेज, ई-चालान, इलेक्ट्रॉनिक बिल ऑफ लैडिंग और ई-कस्टम घोषणाओं के लिए साझा व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई।
गोयल ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच सेवाओं के व्यापार पर अभी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने बताया कि दुनिया में सेवाओं का कुल व्यापार करीब 10 ट्रिलियन डॉलर का है। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच सेवाओं का व्यापार बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए परिवहन और विभिन्न प्रकार की सेवाओं के साथ तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में भी व्यापक अवसर हैं। ब्रिक्स देश मिलकर सेवा क्षेत्र और डिजिटल अर्थव्यवस्था में महिला उद्यमियों तथा एमएसएमई की भागीदारी बढ़ा सकते हैं।
गोयल ने भारत के सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM का उदाहरण देते हुए कहा कि केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों की खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। सरकारी खरीद के अवसरों की जानकारी कारोबारियों को उपलब्ध होती है।
उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद में महिलाओं के नेतृत्व वाले कारोबारों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे महिला उद्यमियों को सरकारी संस्थाओं के लिए वस्तुएं और सेवाएं उपलब्ध कराने का अवसर मिल रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत में करीब 780 जिले हैं और प्रत्येक जिले में एक, दो या तीन प्रमुख उत्पादों की पहचान कर उन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है।
अब इस पहल का विस्तार सेवाओं के क्षेत्र में भी किया जा रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की ओर से स्थानीय व्यंजनों की पहचान करने की पहल का जिक्र किया।
गोयल ने कहा कि भारत में थोड़ी-सी दूरी पर भी खानपान का स्वाद बदल जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों के उत्पाद, मसाले, स्वाद और व्यंजन वैश्विक बाजार के लिए कारोबारी अवसर बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग जिलों में पहचाने गए उत्पादों, सेवाओं और स्थानीय व्यंजनों को राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य जिलों को निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करना और स्थानीय कारोबारों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना है।
गोयल ने ब्रिक्स देशों के बीच अधिक संवाद और सहयोग की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि बेहतर और समृद्ध भविष्य के लिए संवाद और कूटनीति ही आगे बढ़ने का रास्ता है। उनके मुताबिक, भारत और अन्य ब्रिक्स देश मिलकर वस्तुओं और सेवाओं के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।