अमरोहा से विश्व कप तक, मोहम्मद शमी की संघर्ष गाथा

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 10-09-2026
Mohammed Shami: From the pitches of Amroha to World Cup star and Arjuna Awardee.
Mohammed Shami: From the pitches of Amroha to World Cup star and Arjuna Awardee.

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली

जिस खिलाड़ी ने कभी उत्तर प्रदेश के अमरोहा की साधारण पिचों पर टेनिस गेंद से तेज गेंदबाजी का सपना देखा था, उसी ने आगे चलकर दुनिया के बड़े बल्लेबाजों को अपनी रफ्तार और सीम मूवमेंट से परेशान किया। 2023 का वनडे विश्व कप आया तो मोहम्मद शमी ने ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं, बल्कि संघर्ष, चोट, आलोचना और लगातार वापसी की कहानी है।
 
खिलाड़ी का परिचय
 
मोहम्मद शमी का जन्म 3 सितंबर 1990 को उत्तर प्रदेश के अमरोहा में हुआ। वह दाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं और गेंद को सीम के साथ दोनों दिशाओं में मूव कराने के लिए जाने जाते हैं। बचपन से ही तेज गेंदबाजी के प्रति उनका जुनून था।
 
 
शमी के परिवार में क्रिकेट का माहौल था और उनके पिता भी उन्हें खेल की ओर प्रोत्साहित करते थे। बेहद सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे उन्हें उत्तर प्रदेश से कोलकाता और फिर भारतीय क्रिकेट टीम तक ले गया।
 
शुरुआती जीवन और संघर्ष
 
शमी के शुरुआती दिनों में न तो आधुनिक क्रिकेट अकादमी थी और न ही महंगे प्रशिक्षण की सुविधा। 
 
उन्होंने स्थानीय स्तर पर खेलते हुए अपनी तेज गेंदबाजी को निखारा। उनके पिता ने बेटे की प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें बेहतर अवसर दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए।
 
अमरोहा में शुरुआती क्रिकेट के बाद शमी को आगे बढ़ने के लिए कोलकाता जाना पड़ा। वहां उन्होंने क्लब क्रिकेट खेला और अपनी गेंदबाजी से selectors का ध्यान खींचा। कोलकाता के क्लब क्रिकेट ने उन्हें प्रतिस्पर्धी क्रिकेट का अनुभव दिया और बंगाल की घरेलू टीम तक पहुंचने का रास्ता खोला।
 
शमी का सफर इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा के साथ अवसरों की तलाश और लगातार मेहनत भी उतनी ही जरूरी होती है। स्थानीय क्रिकेट से शुरू हुई उनकी यात्रा जल्द ही प्रथम श्रेणी क्रिकेट और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई।
 

खेल करियर की शुरुआत

बंगाल के लिए घरेलू क्रिकेट में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद शमी ने भारतीय टीम में जगह बनाई। उन्होंने 2013 में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया। उसी साल टेस्ट क्रिकेट में भी उन्होंने अपनी जगह बनाई।
 
शमी की सबसे बड़ी ताकत उनकी सीम पोजिशन, रफ्तार और पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग कराने की क्षमता रही। वह नई गेंद से विकेट लेने के साथ-साथ पारी के आखिरी हिस्से में भी बल्लेबाजों के लिए चुनौती बने।
 
इसके बाद उन्होंने भारत के लिए टेस्ट, वनडे और टी20 क्रिकेट में लगातार खेलते हुए खुद को देश के प्रमुख तेज गेंदबाजों में स्थापित किया।
 
देश के लिए उपलब्धियां
 
मोहम्मद शमी ने भारतीय क्रिकेट के लिए कई महत्वपूर्ण मुकाबलों और टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन किया। वह भारत की 2015 और 2019 वनडे विश्व कप टीम का हिस्सा रहे और 2023 विश्व कप में उनके प्रदर्शन ने उन्हें एक अलग मुकाम पर पहुंचा दिया।
 
2023 विश्व कप में शमी ने सिर्फ सात मैचों में 24 विकेट हासिल किए और टूर्नामेंट के सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। भारत के लिए न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने 57 रन देकर 7 विकेट लिए, जो वनडे में किसी भारतीय गेंदबाज का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन है।
उनका 2023 विश्व कप अभियान इसलिए भी खास रहा क्योंकि शुरुआती मुकाबलों में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली थी।
 
हार्दिक पांड्या के चोटिल होने के बाद उन्हें टीम में मौका मिला और उन्होंने इस अवसर को विकेटों की झड़ी लगाकर अपनी पहचान बना दी।
 
भारत 2023 विश्व कप का फाइनल भले ही ऑस्ट्रेलिया से हार गया, लेकिन शमी पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम के सबसे प्रभावशाली गेंदबाजों में रहे।
 
 
अर्जुन अवॉर्ड तक का सफर
 
2023 का विश्व कप शमी के करियर के लिए यादगार रहा और इसी शानदार प्रदर्शन ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित खेल सम्मान तक पहुंचाया।
 
भारत सरकार ने उन्हें 2023 के अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक उपलब्धि सूची में उनके विश्व कप प्रदर्शन को विशेष रूप से दर्ज किया गया है वह 2023 वनडे विश्व कप में भारत के लिए सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे और भारतीय टीम विश्व कप में उपविजेता रही।
 
9 जनवरी 2024 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मोहम्मद शमी को अर्जुन अवॉर्ड प्रदान किया। यह सम्मान उनके लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर और विशेष रूप से 2023 विश्व कप में उनके असाधारण प्रदर्शन की राष्ट्रीय पहचान था।
 
चोट के बाद वापसी बनी सबसे प्रेरक कहानी
 
मोहम्मद शमी के करियर की सबसे प्रेरक कहानियों में से एक उनकी चोट के बाद वापसी है।
 
2023 विश्व कप के दौरान वह चोट की समस्या के बावजूद भारत के लिए लगातार खेलते रहे। विश्व कप के बाद उन्हें लंबे समय तक मैदान से बाहर रहना पड़ा और दाएं पैर की एड़ी की सर्जरी करानी पड़ी।
 
BCCI के अनुसार दिसंबर 2024 तक वह एड़ी की समस्या से पूरी तरह उबर चुके थे, लेकिन गेंदबाजी का भार बढ़ाने के दौरान उनके बाएं घुटने में सूजन की समस्या आई, जिसके कारण उनकी वापसी में और समय लगा।
 
लंबे ब्रेक के बाद उन्होंने 2024 के अंत में घरेलू क्रिकेट से वापसी की और 2025 में भारतीय टीम में भी लौटे। 2025 चैंपियंस ट्रॉफी में उन्होंने भारत की खिताबी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और नौ विकेट लेकर भारत के संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे।
 
यह वापसी इसलिए खास थी क्योंकि एक समय उनके अंतरराष्ट्रीय भविष्य पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन शमी ने मैदान पर प्रदर्शन के जरिए जवाब दिया।
 
आज मोहम्मद शमी क्या कर रहे हैं?
 
2026 में मोहम्मद शमी अभी भी प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में सक्रिय हैं। इस समय वह भारतीय टेस्ट और वनडे योजनाओं में नियमित रूप से शामिल नहीं हैं, लेकिन घरेलू क्रिकेट में अपनी फिटनेस और गेंदबाजी क्षमता साबित करने में जुटे हैं। सितंबर 2026 में उन्होंने दलीप ट्रॉफी में अपना 100वां प्रथम श्रेणी मैच खेला और ईस्ट जोन के लिए प्रभावी गेंदबाजी की।
 
दलीप ट्रॉफी में उनके प्रदर्शन और फिटनेस ने भारत में वापसी की संभावनाओं को फिर चर्चा में ला दिया है। ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने भी शमी की मेहनत और भारतीय टीम में वापसी की भूख की तारीफ की है।
 
शमी ने संन्यास की अटकलों को खारिज करते हुए प्रतिस्पर्धी क्रिकेट जारी रखने की इच्छा जताई है। उनका लक्ष्य 2027 वनडे विश्व कप तक खेलते रहना और भारतीय टीम में वापसी के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करना है।
 
 
 
 
 
शमी की कहानी का संदेश
 
मोहम्मद शमी की कहानी उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो मानते हैं कि एक खराब दौर या चोट उनके करियर का अंत हो सकती है।
 
अमरोहा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचना, विश्व कप में रिकॉर्ड प्रदर्शन करना, चोट के कारण लंबे समय तक बाहर रहना और फिर मैदान पर वापसी करना शमी के करियर में उतार-चढ़ाव लगातार आते रहे, लेकिन उन्होंने हर बार गेंद हाथ में लेकर जवाब दिया।
 
2023 विश्व कप के 24 विकेट और अर्जुन अवॉर्ड उनकी उपलब्धियों के प्रतीक हैं, लेकिन उनकी असली पहचान उस जिद में है जिसने उन्हें हर मुश्किल के बाद दोबारा मैदान पर खड़ा किया।
 
मोहम्मद शमी की कहानी यही बताती है रफ्तार सिर्फ गेंद में नहीं होती, कभी-कभी इंसान के हौसले में भी होती है।