आवाज द वाॅयस/नई दिल्ली
केरल की धरती इन दिनों एक खास पैगाम की गवाह बनी है। अखिल भारतीय सूफी सज्जादा नशीन परिषद (AISSC) के अध्यक्ष हजरत सैयद नासिरुद्दीन चिश्ती ने हाल ही में राज्य का दौरा किया। इस दौरे का मुख्य मकसद समाज में शांति, भाईचारा और महिला सशक्तिकरण की अलख जगाना था। छह और सात सितंबर को चले इस विशेष जनसंपर्क अभियान ने आम लोगों से लेकर खास तबके तक गहरी छाप छोड़ी है।
दौरे की शुरुआत छह सितंबर को वरावौर से हुई। यहां एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में एक हजार से ज्यादा पुरुष और महिलाएं शामिल हुए। भीड़ का यह उत्साह इस बात का सबूत था कि लोग शांति और सद्भाव की बात सुनना चाहते हैं। AISSC के महासचिव और केरल राज्य के उपाध्यक्ष जनाब अब्दुल सबूर साहिब ने इस पूरी सभा की अगुवाई की। कार्यक्रम की अध्यक्षता खुद हजरत सैयद नासिरुद्दीन चिश्ती ने की।

इस दौरान मंच से वक्ताओं ने समाज को जोड़ने वाली बातें कहीं। हजरत सैयद नासिरुद्दीन चिश्ती ने पैगंबर मुहम्मद साहब की शिक्षाओं को याद किया। उन्होंने बताया कि इस्लाम अमन और इंसानियत का दरस देता है। सूफीवाद के रास्ते पर चलकर ही समाज में फैली दूरियों को मिटाया जा सकता है। उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव और हर नागरिक के सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर दिया। लोगों ने उनकी बातों को बहुत ध्यान से सुना और सराहा।
सिलसिला यही नहीं रुका। सात सितंबर का दिन शिक्षा और युवा शक्ति के नाम रहा। कालीकट के एस्कोला इंटरनेशनल स्कूल में एक खास कार्यक्रम रखा गया। इस कार्यक्रम में कक्षा आठ से लेकर बारह तक की पांच सौ से अधिक छात्राएं शामिल हुईं। हजरत साहब ने इन बेटियों से सीधे संवाद किया। बातचीत का दायरा बहुत व्यापक था। इसमें महिला सशक्तिकरण, आज के समाज में महिलाओं की अहम भूमिका, आधुनिक शिक्षा, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे।
बेटियों के लिए यह सत्र बहुत प्रेरणादायक रहा। कार्यक्रम के दौरान एक खुला सवाल जवाब का दौर भी चला। छात्राओं ने खुलकर अपने मन की बात रखी और सवाल पूछे। हजरत साहब ने बहुत सहजता से उनके जवाब दिए। इसी कार्यक्रम के दौरान परिषद का चर्चित अभियान मेरा मुल्क मेरी पहचान भी सुर्खियों में रहा। छात्राओं ने इस मुहिम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। देखते ही देखते पूरा हॉल मेरा मुल्क मेरी पहचान के नारों से गूंज उठा। यह नजारा देखने लायक था जहाँ युवा पीढ़ी ने देश की एकता का संकल्प लिया।
उसी शाम कालीकट में एक और महत्वपूर्ण आयोजन हुआ। इसका नाम तू कुजा मन कुजा रखा गया था। यह आयोजन थोड़े अलग मिजाज का था। इसमें केरल के जाने माने विद्वान, नामचीन हस्तियां, सैयद पन्नाक्कड़ परिवार के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता और व्यापार जगत के बड़े चेहरे शामिल हुए। इस कार्यक्रम में लोगों की संख्या भले ही सीमित थी लेकिन इसका असर बहुत बड़ा था।
इस प्रतिष्ठित सभा में केरल समाज के प्रभावशाली लोग एक मंच पर आए। चर्चा का मुख्य केंद्र इस्लाम की असल शिक्षाएं और पैगंबर साहब का पैगाम था। इसके साथ ही आपसी भाईचारा, महिला सशक्तिकरण और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी पर खुलकर बात हुई। इस तरह की बैठकों से समाज के बुद्धजीवी वर्ग के बीच एक सकारात्मक संदेश गया है। सबने माना कि आज के दौर में ऐसे आयोजनों की बहुत जरूरत है।

केरल के इस पूरे दौरे को मीडिया में भी अच्छी जगह मिली। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय अखबारों तक में इस यात्रा की चर्चा रही। मुस्लिम समुदाय के भीतर और बाहर दोनों जगहों से इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है। लोगों का मानना है कि इस तरह के अभियानों से समाज की सोच बदलती है।
अखिल भारतीय सूफी सज्जादा नशीन परिषद का यह दौरा कई मायनों में सफल रहा है। इसके जरिए संस्था ने अपनी उस प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है जिसमें वह देश भर में शांति और राष्ट्रीय एकता चाहती है।

मेरा मुल्क मेरी पहचान जैसे नारों के साथ आगे बढ़ रही यह संस्था जिम्मेदार नागरिकता और महिला विकास को अपना मुख्य एजेंडा मानती है। केरल के लोगों ने इस पहल का दिल से स्वागत किया है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।