भारत-आसियान कृषि सहयोग को नई दिशा, दिल्ली में हुई अहम बैठक

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 10-09-2026
New direction for India-ASEAN agricultural cooperation; key meeting held in Delhi.
New direction for India-ASEAN agricultural cooperation; key meeting held in Delhi.

 

नई दिल्ली:

भारत और आसियान देशों ने खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि क्षेत्र में सहयोग और मजबूत करने पर जोर दिया है। नई दिल्ली में बुधवार को 9वीं आसियान-भारत कृषि एवं वानिकी मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों पक्षों ने अधिक खाद्य सुरक्षित, टिकाऊ और आपदा एवं जलवायु जोखिमों का सामना करने में सक्षम कृषि व्यवस्था विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक की सह अध्यक्षता फिलीपींस के कृषि विभाग के सचिव फ्रांसिस्को पी. तियू लॉरेल और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की। बैठक में कृषि और वानिकी क्षेत्र में व्यावहारिक तथा किसानों को केंद्र में रखकर सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही कृषि क्षेत्र में आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।

कृषि सहयोग के लिए नई कार्ययोजना पर जोर

आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में ‘आसियान 2045: हमारा साझा भविष्य’ और आसियान खाद्य, कृषि एवं वानिकी क्षेत्रीय योजना 2026-2030 का स्वागत किया गया। इन योजनाओं को टिकाऊ और मजबूत कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक ढांचे के रूप में देखा गया।

मंत्रियों ने कृषि और वानिकी में सहयोग के लिए आसियान-भारत मध्यम अवधि की कार्ययोजना 2026-2030 को अपनाने और लागू करने की दिशा में भी आगे बढ़ने पर सहमति जताई। प्रस्तावित कार्ययोजना में नीतिगत संवाद, डिजिटल तकनीक, तकनीकी सहयोग, संयुक्त शोध, क्षमता निर्माण और किसानों के बीच आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।

जलवायु अनुकूल खेती और एआई पर जोर

बैठक में जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने वाली कृषि को सहयोग का प्रमुख क्षेत्र माना गया। इसके साथ कम उत्सर्जन वाली धान की खेती, पानी की उत्पादकता बढ़ाने, एआई आधारित डिजिटल कृषि, मिट्टी के स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने पर भी चर्चा हुई।

इसके अलावा सर्कुलर बायोइकोनॉमी, कृषि वानिकी और मजबूत कृषि मूल्य श्रृंखला विकसित करने को भी अहम प्राथमिकता दी गई। मंत्रियों ने कहा कि कृषि क्षेत्र में विकसित हो रहे नए प्रयोगों और तकनीकों का फायदा ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचना चाहिए।

इसके लिए शोध संस्थानों, तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों, कृषि विस्तार एजेंसियों, निजी क्षेत्र और किसानों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

जलवायु और वैश्विक चुनौतियों से निपटने पर चर्चा

बैठक में कृषि एवं वानिकी क्षेत्र की बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने, उत्पादों में मूल्यवर्धन और कृषि तथा वानिकी से जुड़ी लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

भारत और आसियान देशों ने माना कि कृषि क्षेत्र के सामने केवल जलवायु परिवर्तन ही चुनौती नहीं है। अत्यधिक मौसम, भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता, कृषि इनपुट की कीमतों में उतार-चढ़ाव, व्यापार में बाधाएं और सीमा पार फैलने वाले कीट एवं रोग भी किसानों और खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई गई।

‘भारत-आसियान मैत्री स्पाइक’ का अनावरण

बैठक का एक प्रमुख आकर्षण ‘इंडिया-आसियान फ्रेंडशिप स्पाइक फॉर एग्रीकल्चर एंड फॉरेस्ट्री’ का अनावरण रहा। इसे कृषि और वानिकी क्षेत्र में भारत और आसियान के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और साझा प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में पेश किया गया।

बैठक में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों ने नई दिल्ली स्थित आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), पूसा का भी दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने संरक्षित खेती केंद्र, बाजरा और धान के खेत, नानाजी देशमुख फेनोमिक्स सुविधा और आईसीएआर-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो के जीन बैंक का निरीक्षण किया।

इस दौरान प्रतिनिधियों को भारत में फसल अनुसंधान, आधुनिक कृषि तकनीकों और पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक एमएल जाट ने किया।

वैज्ञानिकों और उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद

आसियान देशों के कृषि मंत्री और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखों ने भारतीय वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं तथा कारोबारी और औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ भी उच्चस्तरीय संवाद किया। इसका उद्देश्य कृषि एवं वानिकी क्षेत्र में शोध, नवाचार, तकनीकी आदान-प्रदान और उद्योग सहयोग को बढ़ावा देना था।

बैठक में तय किया गया कि 10वीं आसियान-भारत कृषि एवं वानिकी मंत्रिस्तरीय बैठक 2028 में आयोजित की जाएगी।

कृषि कार्य समूह की बैठक में 45 प्रतिनिधि शामिल

इससे एक दिन पहले मंगलवार को नई दिल्ली में 10वीं आसियान-भारत कृषि कार्य समूह की बैठक भी हुई। इसमें आसियान के 11 सदस्य देशों के 45 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में कृषि और वानिकी के क्षेत्र में भारत और आसियान के बीच सहयोग को मजबूत करने के विभिन्न उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

कार्य समूह की बैठक की सह अध्यक्षता भारत और फिलीपींस ने की। भारत की ओर से एमएल जाट ने नेतृत्व किया, जबकि फिलीपींस ने आसियान के अध्यक्ष देश के प्रतिनिधि के तौर पर भाग लिया।

प्रदर्शनी में भारतीय कृषि तकनीकों की झलक

मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की विभिन्न तकनीकों और नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। इसमें प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, सूचना एवं संचार तकनीक, पशु विज्ञान, मत्स्य विज्ञान और बागवानी विज्ञान से जुड़ी तकनीकों को प्रमुखता दी गई।

प्रदर्शनी में मिट्टी के स्वास्थ्य और जलवायु अनुकूल खेती से जुड़े समाधान भी दिखाए गए। किसान सारथी प्लेटफॉर्म को भी प्रदर्शित किया गया, जो 13 भारतीय भाषाओं में 3.03 करोड़ पंजीकृत किसानों और 3.5 लाख से अधिक गांवों तक सेवाएं पहुंचा रहा है। इसमें 3,500 से ज्यादा कृषि विज्ञान केंद्र विशेषज्ञ और 4,500 आईसीएआर वैज्ञानिक जुड़े हैं।

इसके अलावा अफ्रीकी स्वाइन फीवर के लिए स्वदेशी वैक्सीन, पशु रोगों की पूर्व चेतावनी प्रणाली, मत्स्य पालन से जुड़ी तकनीकें और 40 से 50 टन उत्पादन क्षमता वाले 120 दिन के झींगा पालन मॉडल को भी प्रदर्शनी में जगह मिली।

बागवानी क्षेत्र में विविध फसलों, मसालों, मूल्यवर्धित उत्पादों और एरोपोनिक्स तकनीक के जरिए वायरस मुक्त आलू बीज उत्पादन से जुड़ी तकनीकों को भी प्रदर्शित किया गया।

इस अवसर पर 8 सितंबर को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाला विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। बैठक ने भारत और आसियान के बीच कृषि तथा वानिकी सहयोग को तकनीक, शोध और किसान केंद्रित नवाचारों के जरिए नई गति देने का रास्ता तैयार किया है।