फरहान इसराइली/ जयपुर
पढ़ाई करने की ललक और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो रास्ते खुद ब खुद निकल आते हैं। कई बार ऐसा होता है कि सब कुछ ठीक होने के बावजूद पैसों की तंगी बच्चों के सपनों के बीच दीवार बन जाती है। ऐसे ही बच्चों के लिए उम्मीद की एक नई किरण नजर आई है। जयपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है जो दिल को सुकून देती है।
मुस्लिम तेली महापंचायत की तरफ से एक खास पहल शुरू की गई है। इस पहल का नाम ‘इल्मी बैतूल माल’ है। इसके जरिए उन विद्यार्थियों की मदद की जाती है जो आर्थिक तंगी के कारण आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाते। सबसे अच्छी बात यह है कि इन बच्चों को बिना किसी ब्याज के शिक्षा ऋण दिया जा रहा है।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका काम करने का तरीका है। इसे किसी आम फंड की तरह एक बार पैसे बांटकर खत्म नहीं किया जाता। बल्कि इसे एक रिवॉल्विंग फंड के तौर पर चलाया जा रहा है।
यानी जितनी रकम छात्र को पढ़ाई के लिए दी जाती है, वही मूल रकम बाद में उससे वापस ली जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में कोई ब्याज या अतिरिक्त पैसा नहीं वसूला जाता। अब्दुल लतीफ आर्को बताते हैं कि बच्चों से पैसे वापस मांगने के लिए कोई सख्त समय सीमा तय नहीं की जाती। हर छात्र के हालात अलग होते हैं। इसलिए उसकी पारिवारिक स्थिति को देखकर ही समय दिया जाता है।
यदि कोई विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी पा लेता है और पैसे लौटाने की स्थिति में आ जाता है, तो वह आराम से रकम वापस कर सकता है। अब्दुल लतीफ का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता यही है कि बच्चा पहले अपनी पढ़ाई मुकम्मल करे।
जब वह अपने पैरों पर खड़ा हो जाए और कमाने लगे, तब वह मूल राशि लौटा सकता है। इस तरह से मिलने वाला वही पैसा आगे चलकर किसी दूसरे जरूरतमंद छात्र की पढ़ाई में काम आता है। इस चक्र के कारण यह फंड लगातार सक्रिय बना रहता है और ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक मदद पहुंचती है।
पिछले दो साल से यह पूरी व्यवस्था बहुत ही सुचारू रूप से चल रही है। इन दो सालों में इस फंड के जरिए कुल पांच विद्यार्थियों की मदद की जा चुकी है। इन छात्रों में वे युवा शामिल हैं जो उच्च शिक्षा ले रहे हैं, मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं या फिर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं।
इस बारे में जानकारी देते हुए अब्दुल लतीफ ने बताया कि जयपुर के ही एक प्रतिभावान छात्र को मेडिकल की पढ़ाई के लिए एक लाख रुपये की बड़ी सहायता दी गई थी। इसके अलावा एक दूसरे छात्र को कोचिंग के वास्ते करीब 50से 55हजार रुपये की जरूरत आन पड़ी थी। उस मामले में 25हजार रुपये महापंचायत की तरफ से दिए गए और बाकी के 25हजार रुपये बैतूल माल के जरिए जुटाए गए।
इस पूरी सहायता प्रक्रिया की एक और खूबी यह है कि इसमें छात्रों से कोई भारी भरकम गारंटी या बैंक चेक नहीं मांगा जाता। कागजी कार्रवाई के नाम पर बच्चों को परेशान नहीं किया जाता। मदद देने से पहले केवल यह सुनिश्चित किया जाता है कि बच्चा वाक़ई जरूरतमंद है या नहीं।
इसके लिए दो स्थानीय और जिम्मेदार लोगों से उस छात्र की आर्थिक स्थिति के बारे में बातचीत की जाती है। यह भी परखा जाता है कि जिस कोर्स के लिए पैसों की मांग की जा रही है, वह सही है या नहीं। जैसे ही यह पुष्टि हो जाती है, वैसे ही पैसों का वितरण शुरू कर दिया जाता है।
वितरण का तरीका भी पूरी तरह पारदर्शी रखा गया है। स्वीकृत की गई रकम सीधे छात्र के हाथ में नगद नहीं दी जाती। बल्कि वह पैसा संबंधित कॉलेज, कोचिंग संस्थान या स्कूल के नाम पर भेजा जाता है।
फीस के रूप में मिलने वाली यह रकम सीधे संस्थान के पास जाती है। इस सावधानी का मकसद साफ है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शिक्षा के नाम पर मिलने वाला एक एक रुपया सिर्फ पढ़ाई में ही इस्तेमाल हो। पैसों का कोई और गलत उपयोग न हो सके, इसका पूरा ख्याल रखा जाता है।
यह पूरा सिस्टम पूरी तरह से समाज के आपसी सहयोग पर टिका हुआ है। ‘इल्मी बैतूल माल’ में आने वाला पैसा मुख्य रूप से मुस्लिम तेली समाज के लोगों के दान और सहयोग से इकट्ठा होता है। अच्छी बात यह है कि इस नेक काम में दूसरे समाजों के लोग भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।
जो लोग भी गरीब बच्चों की पढ़ाई में हाथ बंटाना चाहते हैं, वे इसमें अपनी तरफ से योगदान देते हैं। इस फंड की देखरेख मुस्लिम तेली महापंचायत की कमेटी करती है। कमेटी के सभी सदस्य मिलकर बैठते हैं और हर एक मामले पर विचार करते हैं। छात्र की जरूरत और उसकी असल स्थिति को देखने के बाद ही मदद पर अंतिम मुहर लगाई जाती है।
हालांकि इस फंड का मुख्य आधार मुस्लिम तेली समाज के लोग हैं और उनके बच्चों को प्राथमिकता मिलती है, लेकिन इसका दायरा सिर्फ एक समाज तक सीमित नहीं रखा गया है। यदि कोई दूसरा जरूरतमंद छात्र भी अपनी परेशानी लेकर सामने आता है, तो उसके हालात को परखा जाता है।
उसकी जरूरत के हिसाब से उसकी भी पूरी मदद की जाती है। यही नियम बेटियों की पढ़ाई पर भी लागू होता है। मदद का पैमाना लड़का या लड़की होना नहीं है, बल्कि उस छात्र की असल जरूरत और उसकी योग्यता है।
इसी कड़ी का ताजा उदाहरण हाल ही में सामने आया है। करौली जिले के हिंडौन सिटी की गुलशन कॉलोनी के रहने वाले पप्पू मास्टर के बेटे मोहम्मद जुबेर तेली को बड़ा सहारा मिला है। जुबेर की बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई के लिए महापंचायत ने हाथ आगे बढ़ाया है।
उनकी ट्यूशन फीस कुल छियासठ हजार रुपये है। इस फीस का आधा हिस्सा यानी पूरे तैंतीस हजार रुपये का ब्याज मुक्त शिक्षा ऋण मंजूर किया गया है। यह पूरा पैसा बिना किसी ब्याज के दिया गया है। जब जुबेर अपनी पढ़ाई पूरी कर लेंगे और उन्हें कोई रोजगार मिल जाएगा, तब वे इस मूल रकम को धीरे धीरे वापस लौटाएंगे।
इस सहायता राशि का आधिकारिक चेक हाल ही में मुस्लिम तेली महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल लतीफ आर्को ने खुद पप्पू मास्टर को सौंपा। इस मौके पर समाज के कई अन्य प्रमुख लोग भी वहां मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान महापंचायत के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मोहम्मद रमजान और करौली जिला अध्यक्ष आरिफ तेली ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और इस कदम की सराहना की। सभी ने माना कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की मदद युवाओं का भविष्य संवारने के लिए बहुत जरूरी है।
मोहम्मद जुबेर तेली इन दिनों भरतपुर के एक प्रतिष्ठित निजी कॉलेज से बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे पूरी फीस एक साथ आसानी से भर पाते।
जब यह बात सामने आई तो परिवार की मुश्किलों को देखते हुए ‘इल्मी बैतूल माल’ ने तुरंत कदम उठाया। फीस का ठीक आधा हिस्सा शिक्षा ऋण के रूप में पास कर दिया गया। इस पैसे को भी सीधे कॉलेज के खाते में पहुंचाया गया ताकि जुबेर की पढ़ाई में किसी भी तरह की रुकावट न आए।
आज के समय में जब शिक्षा बहुत महंगी हो गई है, ऐसी स्थानीय और सामाजिक पहलें किसी वरदान से कम नहीं हैं। यह सोच वास्तव में बहुत प्रेरणादायक है कि आज किसी बच्चे को पढ़ाओ और जब वह अपने पैरों पर खड़ा हो जाए तो उसी पैसे से किसी और का घर रोशन करो।
मुस्लिम तेली महापंचायत का यह प्रयास समाज के दूसरे वर्गों के लिए भी एक मिसाल बन रहा है। इससे न सिर्फ गरीब बच्चों को पढ़ने का मौका मिल रहा है, बल्कि समाज में एक दूसरे की मदद करने की भावना भी मजबूत हो रही है। आने वाले दिनों में इस योजना के और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है ताकि देश के कोने कोने तक ऐसे जरूरतमंद युवाओं की आवाज पहुंच सके और उनकी राह आसान हो सके।