आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
इंफाल के क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) ने कहा है कि लोगों को चिकित्सा उपचार प्रदान करना उसकी एकमात्र जिम्मेदारी है और अस्पताल में मरीजों को लाने की जिम्मेदारी उसकी नहीं है।
यह बयान उस घटना के एक दिन बाद आया है, जब अस्पताल परिसर में उपचाराधीन तीन युवकों को उग्रवादी बताए जाने के आरोपों को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे और पुलिस ने लाठीचार्ज किया था।
अस्पताल में इलाज करा रहे तीनों घायल कुकी समुदाय से हैं और उन्हें सुरक्षा बलों द्वारा रिम्स लाया गया था। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि क्या कांगपोकपी जिले के कुकी-बहुल इलाकों से गुजरने वाले आम नागरिकों को भी ऐसी ही सुरक्षा व्यवस्था मिलेगी।
सोमवार रात जारी एक बयान में रिम्स ने कहा, ‘‘घायलों को आवश्यक चिकित्सा उपचार के लिए लेइमाखोंग के ‘183 सैन्य अस्पताल’ प्रबंधन द्वारा लाया गया था।’’
संस्थान ने इन आरोपों को खारिज किया कि घायलों को अस्पताल लाने और बाद की सुरक्षा व्यवस्था के लिए रिम्स प्रशासन जिम्मेदार है।
रिम्स ने कहा, ‘‘मरीजों को अस्पताल लाने या सुरक्षाकर्मियों की तैनाती में संस्थान की कोई भूमिका नहीं है।’’
इसने कहा, ‘‘घायलों को लेइमाखोंग के 183 सैन्य अस्पताल ने रेफर किया था और उसके बाद उन्हें यहां लाया गया था और उनकी आवाजाही तथा इलाज से संबंधित सुरक्षा व्यवस्था संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई थी।’’
संस्थान ने कहा, ‘‘रिम्स की एकमात्र जिम्मेदारी अस्पताल में लाए गए सभी मरीजों को चिकित्सा देखभाल प्रदान करना है। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का यह पेशेवर, नैतिक और मानवीय कर्तव्य है कि वे पृष्ठभूमि या परिस्थितियों की परवाह किए बिना मरीजों की देखभाल करें और उनका इलाज करें।’’