आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को असम के कछार जिले से जीवंत ग्राम कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत की, जिसमें 15 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 1,954 सीमावर्ती गांवों को शामिल किया जायेगा।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार द्वारा सीमावर्ती गांवों को सुदृढ़ करने और इन क्षेत्रों में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के प्रयासों का एक हिस्सा है।
इसमें कहा गया है कि जीवंत ग्राम कार्यक्रम-द्वितीय एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसके लिए वित्तीय वर्ष 2028-29 तक 6,839 करोड़ रुपये का परिव्यय किया गया है और इसे 15 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में लागू किया जायेगा।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों का व्यापक और सतत विकास सुनिश्चित करना है।
बयान में कहा गया है कि इसका उद्देश्य आवश्यक बुनियादी ढांचे में सुधार करना, बुनियादी सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना और स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करना है, जिससे विकसित भारत-2047 की परिकल्पना के अनुरूप सुरक्षित, लचीले और समृद्ध सीमावर्ती समुदायों का विकास हो सके।
बयान के अनुसार, इन गांवों को सशक्त बनाकर, यह कार्यक्रम निवासियों को राष्ट्र की आंख और कान के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाता है, जिससे सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।
गृह मंत्रालय द्वारा वीवीपी के पहले चरण के तहत 3,431 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली 2,558 परियोजनाओं/कार्यों को मंजूरी दी गई थी और जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा शिविर, मेले और त्योहार और पर्यटन को बढ़ावा देने समेत 8,500 से अधिक गतिविधियां शुरू की गई हैं।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने तीन फरवरी को लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा था कि सरकार ने दो अप्रैल, 2025 को दूसरे चरण को मंजूरी दे दी थी जिसमें 15 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 1,954 सीमावर्ती गांवों को व्यापक विकास के लिए चिह्नित किया गया है।