तिराना [अल्बानिया]
अल्बानियाई-अमेरिकी संबंध परिषद (AARC) ने अल्बानिया की राजधानी तिराना में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर गहरी चिंता जताई है। परिषद ने हिंसा की निंदा की है और सभी पक्षों से संयम बरतने, लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करने और कानून के शासन को बनाए रखने की अपील की है। एक बयान में, परिषद ने कहा कि हालांकि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतंत्र का एक बुनियादी स्तंभ है, लेकिन हिंसा, संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और शारीरिक टकराव उन उद्देश्यों को ही कमजोर करते हैं जिन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी आगे बढ़ाना चाहते हैं।
परिषद ने जोर देकर कहा कि नागरिकों, विशेष रूप से छात्रों और युवाओं की चिंताओं को गंभीरता और सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए और उनका समाधान किया जाना चाहिए। परिषद ने जनता के जायज गुस्से को नजरअंदाज करने या उस पर अनावश्यक बल प्रयोग करने के खिलाफ भी चेतावनी दी। AARC ने कहा, "हम हिंसा की कड़ी निंदा करते हैं, चाहे वह कहीं से भी हो। हम सभी पक्षों से संयम बरतने, लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करने और कानून के शासन को बनाए रखने की अपील करते हैं।"
परिषद ने इस बात पर विशेष चिंता जताई कि इन प्रदर्शनों के दौरान 70 से अधिक पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ गंभीर रूप से घायल हैं। इसके अलावा, सरकारी इमारतों और अन्य सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इन घटनाओं को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए, AARC ने कहा कि ऐसे दृश्य उस देश के लिए चिंता का विषय हैं, जिसने अपने कठिन अतीत से उबरने के लिए कड़ी मेहनत की है और जो अपनी यूरोपीय आकांक्षाओं की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
परिषद ने कहा कि यूरोपीय संघ की सदस्यता की दिशा में अल्बानिया की प्रगति को सरकारी संस्थानों के जलने, हिंसक टकरावों और व्यापक तबाही की तस्वीरों से नुकसान पहुंच सकता है। ऐसी घटनाएं यूरोपीय साझेदारों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच गलत संदेश भेजती हैं। परिषद का मानना है कि इस तरह की हरकतें जवाबदेही या सुधार की जायज मांगों को आगे नहीं बढ़ातीं, बल्कि इनसे अल्बानिया की प्रगति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
AARC ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग, पत्रकारों पर हमलों और अन्य हिंसक घटनाओं के आरोपों की तत्काल, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग की है।
परिषद ने जोर दिया कि गैर-कानूनी कार्यों के लिए जिम्मेदार लोगों को, चाहे उनका पद या संबद्धता कुछ भी हो, जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। परिषद ने यह भी चेतावनी दी कि आंतरिक अस्थिरता का दौर उन ताकतों के लिए अवसर पैदा कर सकता है जो अल्बानिया की लोकतांत्रिक प्रगति, राष्ट्रीय स्थिरता और यूरो-अटलांटिक एकीकरण के खिलाफ हैं। बयान में कहा गया है, "कुछ ऐसी ताकतें हैं जो अल्बानिया के कमजोर और बंटे हुए होने का स्वागत करेंगी। जनता की जायज नाराजगी का फायदा उठाने की उनकी कोशिशों को कम करके नहीं आंकना चाहिए।"
हालांकि, इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि ऐसी चिंताओं का इस्तेमाल नागरिकों की वास्तविक शिकायतों या शांतिपूर्ण विरोध के उनके मौलिक अधिकार को कमजोर करने के लिए कभी नहीं किया जाना चाहिए। AARC ने आगे चेतावनी दी कि राजनीतिक ध्रुवीकरण, संस्थागत विफलताओं या बढ़ती हिंसा को देश की लोकतांत्रिक उपलब्धियों और यूरोपीय आकांक्षाओं के लिए खतरा नहीं बनने देना चाहिए।
इसने अल्बानियाई सरकार से आग्रह किया कि वह नागरिकों के साथ सच्ची और रचनात्मक बातचीत करे, उनकी जायज चिंताओं का समाधान करे और यह सुनिश्चित करे कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां पेशेवर तरीके से और उचित अनुपात में काम करें।
काउंसिल ने राजनीतिक नेताओं, नागरिक समाज और प्रदर्शनकारियों से भी अपील की कि वे हिंसा को त्यागें और दलगत हितों से ऊपर उठकर देश के दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता दें। बयान में आगे कहा गया, "अल्बानिया शांति, जवाबदेही और ऐसी नेतृत्व क्षमता का हकदार है जो लोगों की बात सुने। इसका भविष्य लोकतांत्रिक भागीदारी, मौलिक अधिकारों के सम्मान और स्थिरता, समृद्धि तथा यूरोपीय एकीकरण के प्रति साझा प्रतिबद्धता के जरिए तय होना चाहिए।"
AARC का यह बयान तिराना में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के तेज होने के बीच आया है, जहां हजारों प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। छात्र भी इस व्यापक विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं। वे ट्यूशन फीस कम करने, शिक्षा के लिए फंड बढ़ाने और शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं। खबरों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर, फ्लेयर्स और फायरबॉम्ब फेंके। शाम तक जारी रहे इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
बढ़ती महंगाई और सेवाओं में गिरावट को लेकर जनता में भारी गुस्सा है, जिससे अल्बानियाई सरकार पर दबाव और बढ़ गया है। AARC की ओर से संयम बरतने और बातचीत करने की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब अल्बानिया यूरोपीय संघ की सदस्यता की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान देश के सामने लोकतांत्रिक जवाबदेही, जनता की शिकायतों और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।