आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जलवायु संकट से निपटने में महत्वपूर्ण क्षमता रखती है, लेकिन इसकी उच्च ऊर्जा और जल आवश्यकताएं यदि ठीक से प्रबंधित न की जाएं तो यह पर्यावरणीय चुनौतियों को और भी बदतर बना सकती है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) में जलवायु परिवर्तन प्रभाग के निदेशक मार्टिन क्राउज़ ने ‘पीटीआई-वीडियो’ के साथ साक्षात्कार में कहा कि जलवायु के दृष्टिकोण से एआई एक विशाल अवसर और एक गंभीर जोखिम दोनों प्रस्तुत करता है।
जलवायु समाधान के तहत एआई के उदाहरणों का हवाला देते हुए अधिकारी ने एआई-संचालित प्रारंभिक मौसम चेतावनी प्रणालियों, नवीकरणीय ग्रिड एकीकरण और उत्सर्जन स्रोतों का तुरंत पता लगाने के लिए उपग्रह-आधारित चेतावनी प्रणालियों पर प्रकाश डाला। साथ ही डेटा केंद्रों की महत्वपूर्ण जल और ऊर्जा मांगों पर चिंता व्यक्त की।
दिल्ली में हाल में संपन्न हुए ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में भाग लेने वाले क्राउज ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया, ‘‘एआई पहले से ही बाढ़ और तूफान जैसी मौसम संबंधी चेतावनियों का अनुमान लगाने में काफी अधिक सटीकता के साथ मदद कर रहा है और अगर इसे बड़े पैमाने पर उपयोग में लाया जाता है तो यह करोड़ों लोगों की रक्षा कर सकता है।’’