Accused who issued bomb threat to Ajmer court arrested.
जयपुर।
राजस्थान पुलिस ने अजमेर जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर को बम से उड़ाने की झूठी धमकी देकर दहशत फैलाने वाले आरोपी को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर न्यायालय की आधिकारिक ई-मेल पर धमकी भरा संदेश भेजा था। पुलिस ने तकनीकी जांच और साइबर विश्लेषण के आधार पर उसकी पहचान कर उसे गिरफ्तार किया। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को अजमेर जिला एवं सत्र न्यायालय की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर एक धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ था। इस संदेश में दावा किया गया था कि न्यायालय परिसर को बम से उड़ा दिया जाएगा। धमकी मिलने के बाद न्यायालय परिसर में सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं और एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
घटना की सूचना मिलने के बाद न्यायालय प्रशासन ने सिविल लाइंस थाना, अजमेर में मामला दर्ज कराया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(1)(बी) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की।
अजमेर के जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) हर्षवर्धन अगरवाला ने बताया कि मामले की जांच के लिए साइबर प्रकोष्ठ की विशेष टीम गठित की गई। टीम ने फर्जी ई-मेल आईडी की तकनीकी जांच, डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की पड़ताल की। इसके साथ ही आसूचना तंत्र की मदद से आरोपी की पहचान सुनिश्चित की गई।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि धमकी देने वाला व्यक्ति फलदू हार्दिक पुत्र रमेशचंद्र पटेल (40 वर्ष) है, जो गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के प्रभास पाटन का निवासी है। इसके बाद राजस्थान पुलिस की टीम ने गुजरात पहुंचकर स्थानीय पुलिस के सहयोग से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया है कि आरोपी ने फर्जी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल कर धमकी भेजी थी। हालांकि, उसने ऐसा क्यों किया और उसके पीछे क्या उद्देश्य था, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं आरोपी किसी संगठित नेटवर्क से जुड़ा तो नहीं था या उसने यह हरकत केवल दहशत फैलाने के उद्देश्य से की थी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल अपराधों और फर्जी ई-मेल के जरिए धमकी देने वाले मामलों में साइबर फॉरेंसिक तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी तकनीकी जांच की मदद से आरोपी तक पहुंचना संभव हो सका। मामले में जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि धमकी भेजने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि न्यायालय, सरकारी संस्थानों या सार्वजनिक स्थानों को झूठी बम धमकी देना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाती है, क्योंकि इससे न केवल लोगों में भय का माहौल बनता है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक संसाधनों पर भी अनावश्यक दबाव पड़ता है।
फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उसे अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।