A spectacular welcome for Ahmedabad 2030; India demonstrates its strength.
ग्लासगो
राष्ट्रमंडल खेल 2026 के भव्य समापन समारोह में भारत ने अपनी समृद्ध संस्कृति, संगीत और आधुनिक सोच का शानदार प्रदर्शन करते हुए अहमदाबाद 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की औपचारिक शुरुआत कर दी। समापन समारोह के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स का ध्वज आधिकारिक रूप से भारत को सौंपा गया। इसके साथ ही वर्ष 2030 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों का नया अध्याय शुरू हो गया।
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अनुसार, यह अवसर कई मायनों में ऐतिहासिक है। करीब दो दशक बाद राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी फिर भारत के पास आई है और पहली बार गुजरात का अहमदाबाद इस प्रतिष्ठित बहु-खेल आयोजन का मेजबान बनेगा। वर्ष 2030 का संस्करण राष्ट्रमंडल खेलों का शताब्दी संस्करण भी होगा।
भारतीय संस्कृति ने जीता दुनिया का दिल
ध्वज हस्तांतरण समारोह के बाद भारत ने एक मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर पूरे स्टेडियम को भारतीय रंगों में रंग दिया। कार्यक्रम में भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक भारत की नई पहचान का अनूठा संगम देखने को मिला।
प्रसिद्ध सितार वादक ऋषभ रिखीराम शर्मा की मधुर प्रस्तुति और जाने-माने गायक शंकर महादेवन की दमदार आवाज़ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंग-बिरंगी रोशनी, आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों और आधुनिक दृश्य प्रभावों के माध्यम से भारत की विविधता, संस्कृति और ऊर्जा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
स्टेडियम में मौजूद खिलाड़ियों, अधिकारियों और दर्शकों ने भारतीय प्रस्तुति का जोरदार स्वागत किया। कई लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं और इस ऐतिहासिक पल को अपने कैमरों में कैद किया।
खेलों से मेजबानी तक का सफर
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई खेलों में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। अब भारत की भूमिका एक सफल प्रतिभागी से बदलकर सफल मेजबान बनने की ओर बढ़ गई है।
पूरे खेलों के दौरान भारत ने 'अहमदाबाद एक्सपीरियंस सेंटर' के माध्यम से खिलाड़ियों, अधिकारियों और आगंतुकों को वर्ष 2030 के आयोजन की झलक भी दिखाई। इसके साथ ही केंद्रीय युवा एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में 14 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने आयोजन की व्यवस्थाओं का विस्तृत अध्ययन किया, ताकि अहमदाबाद 2030 को विश्वस्तरीय बनाया जा सके।
खिलाड़ियों को केंद्र में रखकर होगा आयोजन
भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी.टी. उषा ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों का ध्वज स्वीकार करना भारत के लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने कहा कि ग्लासगो में भारतीय खिलाड़ियों ने समर्पण, जुनून और उत्कृष्ट खेल भावना का परिचय दिया। अब यही उपलब्धियां अहमदाबाद 2030 की प्रेरणा बनेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत खिलाड़ियों को केंद्र में रखकर ऐसा आयोजन करेगा, जो खेल उत्कृष्टता, भारतीय संस्कृति, मेहमाननवाजी और आधुनिक खेल सुविधाओं का अद्भुत संगम होगा।
भारत की खेल यात्रा का नया पड़ाव
अहमदाबाद 2030 भारत की दीर्घकालिक खेल नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। खिलाड़ियों के विकास, आधुनिक खेल अवसंरचना और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की दिशा में लगातार किए जा रहे निवेश के साथ यह आयोजन भारत की खेल यात्रा में एक नया मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है।
ग्लासगो 2026 के समापन के साथ अब दुनिया की निगाहें अहमदाबाद 2030 पर टिक गई हैं। भारत ने अपने सांस्कृतिक वैभव और आयोजन क्षमता की पहली झलक दिखाकर स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वह राष्ट्रमंडल खेलों के शताब्दी संस्करण को यादगार और ऐतिहासिक बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।