नई दिल्ली/जोधपुर।
राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में मस्जिदों, दरगाहों और अन्य धार्मिक स्थलों के ध्वस्तीकरण को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने इन कार्रवाइयों को धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और इबादत के अधिकार पर गंभीर हमला बताते हुए इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का संकेत दिया है।
जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती सैयद मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने किया। प्रतिनिधिमंडल ने बाड़मेर में प्रभावित मस्जिदों, मदरसों के जिम्मेदारों और स्थानीय लोगों से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया।
बैठक के दौरान प्रभावित लोगों ने धार्मिक स्थलों पर हुई कार्रवाई से जुड़ी जानकारी साझा की। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें भरोसा दिलाया कि जमीयत उलेमा-ए-हिन्द इस मामले में उनके साथ मजबूती से खड़ी है और न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
जमीयत के नेताओं ने तथाकथित ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत की जा रही कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ये धार्मिक स्थल दशकों और कई मामलों में सदियों से मौजूद थे तथा कभी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं माने गए, तो अचानक उन्हें सुरक्षा के लिए खतरा बताना न्याय और तर्क दोनों के विपरीत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की भावना के खिलाफ है।
प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से मांग की कि धार्मिक स्थलों के विरुद्ध एकतरफा कार्रवाइयों को तत्काल रोका जाए और कानून के शासन को सुनिश्चित किया जाए। संगठन का कहना है कि संविधान की सर्वोच्चता और सभी नागरिकों के अधिकारों की समान सुरक्षा ही राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव की वास्तविक नींव है।
जमीयत ने मुस्लिम समुदाय से भी शांति बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखने की अपील की। साथ ही मस्जिदों को सामूहिक नमाज के माध्यम से आबाद रखने का आह्वान किया गया।
जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के उपाध्यक्ष कारी मोहम्मद अमीन पोकरण और जमीयत उलेमा राजस्थान के महासचिव मौलाना अब्दुल वहीद खत्री ने बताया कि मामले में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से परामर्श जारी है तथा जल्द ही आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर, फलोदी, जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में अब तक कई मस्जिदों, दरगाहों और अन्य धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया जा चुका है। उनके अनुसार बीकानेर में चार मस्जिदें और फलोदी, जैसलमेर तथा बाड़मेर में नौ मस्जिदें एवं कई दरगाहें प्रभावित हुई हैं। इसके अतिरिक्त सैकड़ों अन्य धार्मिक स्थलों को नोटिस जारी किए गए हैं।
जमीयत नेताओं ने कहा कि राजस्थान का यह सीमावर्ती क्षेत्र सदियों से सांप्रदायिक सौहार्द, भाईचारे और साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक रहा है। यहां स्थित मस्जिदें, दरगाहें और अन्य धार्मिक स्थल स्थानीय इतिहास और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं, जिनका संरक्षण आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल में मौलाना मोहम्मद कासिम नूरी कासमी, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद तैयब खान, मुफ्ती मोहम्मद हस्सान इब्राहीम कासमी सहित कई प्रमुख पदाधिकारी शामिल थे। राजस्थान इकाई के अध्यक्ष मौलाना हबीबुल्लाह कासमी और अन्य स्थानीय पदाधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।