आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
विप्रो लिमिटेड के कार्यकारी चेयरमैन रिशद प्रेमजी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत के पास कृत्रिम मेधा (एआई) के अनुप्रयोग के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक बनने का अवसर है।
प्रेमजी ने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में भारत की बढ़त उन विकल्पों से तय होगी, जो वह प्रौद्योगिकी की इस नयी लहर को लागू करने, इसके विस्तार और जिम्मेदारी के साथ इसके उपयोग के संबंध में चुनेगा। उन्होंने कहा कि देश के लिए अपनी क्षमताओं को वास्तविक प्रभाव में बदलना अनिवार्य है।
'एआई इम्पैक्ट समिट' को संबोधित करते हुए प्रेमजी ने कहा कि एआई पीढ़ी में एक बार आने वाली ऐसी प्रौद्योगिकी है जो न केवल हमारे काम करने के तरीके को बदलती है, बल्कि यह भी बदल देती है कि हमें क्या करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘अगले कुछ वर्षों में भारत इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है, इससे न केवल हमारा आर्थिक भविष्य तय होगा, बल्कि एक अरब से अधिक लोगों की समस्याओं को हल करने की हमारी क्षमता भी आकार लेगी।’’
प्रेमजी ने कहा कि एआई पर चर्चा अब संभावनाओं से हटकर व्यावहारिकता और इसे अपनाने पर केंद्रित हो गई है।