Weight loss advice is disturbing; weight discrimination should not be a factor in health promotion.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
क्या कभी आप अपने डॉक्टर के पास यह पता लगाने गए हैं कि आपको हमेशा थकान क्यों रहती है? और डॉक्टर ने आपको वजन घटाने की सलाह दे दी? या फिर आप अधिक सक्रिय रहने की उम्मीद से जिम गए हों, लेकिन वहां आपको बार-बार ‘मोटापा घटाने और छरहरी काया’ पाने के संदेश सुनने को मिले हों?
ये अनुभव स्वास्थ्य संवर्धन के उस आम नजरिये को दर्शाते हैं, जिसमें बेहतर स्वास्थ्य का मुख्य कारण कम वजन माना जाता है। लेकिन शोध बताते हैं कि वजन पर ध्यान केंद्रित करने से वजन को लेकर भेदभाव बढ़ता है।
वजन को लेकर भेदभाव का मतलब है कि अधिक वजन वाले लोगों के प्रति उनके वजन के आधार पर नकारात्मक रवैया अपनाना या उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करना। इसमें यह अनुचित धारणा भी शामिल है कि अधिक वजन वाले लोग आलसी, कम बुद्धिमान या इच्छाशक्ति की कमी वाले होते हैं।
ये धारणाएं इतनी आम हैं कि अधिक वजन वाले लोगों के साथ बुरा व्यवहार करना अक्सर ‘सामाजिक रूप से स्वीकार्य’ माना जाता है। लोकप्रिय टीवी कार्यक्रमों में अधिक वजन वाले किरदारों का अक्सर हास्य पैदा करने के लिए क्रूर ‘मजाक’ उड़ाया जाता है।
वजन को लेकर भेदभाव का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। अधिक वजन वाले लोग यह सोच कर खेलने, डॉक्टर के पास जाने या किसी के साथ डेट पर जाने से डर भी सकते हैं कि उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाएगा।