भारत में डॉक्टरों की सुरक्षा पर जोर, 65 हजार लापरवाही के मामले

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 30-10-2026
Doctors’ protection must be central to India’s healthcare expansion amid 65,000 reported negligence cases, says CoverYou
Doctors’ protection must be central to India’s healthcare expansion amid 65,000 reported negligence cases, says CoverYou

 

नई दिल्ली
 
भारत अपने मेडिकल वर्कफोर्स (चिकित्सा कार्यबल) का तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन डॉक्टरों को मिलने वाले कानूनी और पेशेवर सुरक्षा उपायों की अब बारीकी से जांच की जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2026 तक भारत में 15.35 लाख से अधिक पंजीकृत एलोपैथिक डॉक्टर थे, जबकि 2025-26 शैक्षणिक वर्ष के लिए पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों की संख्या 86,360 तक पहुंच गई है।
 
वहीं, 2025 में विभिन्न न्यायिक मंचों पर चिकित्सा लापरवाही (medical negligence) के लगभग 65,000 मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़ा स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के सामने मौजूद चिकित्सा-कानूनी (medico-legal) चिंताओं की गंभीरता को दर्शाता है। जैसे-जैसे भारत अधिक डॉक्टरों को प्रशिक्षित कर रहा है और विशेष चिकित्सा सेवाओं का विस्तार कर रहा है, एक अहम सवाल उठता है: क्या डॉक्टरों की जिम्मेदारियों और उनके सामने आने वाले जोखिमों के साथ-साथ उनकी पेशेवर सुरक्षा के तंत्र भी विकसित हो रहे हैं?
 
इस पृष्ठभूमि में, डॉक्टरों, क्लीनिकों और अस्पतालों के लिए सुरक्षा प्रदान करने वाले इंश्योरेंस ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म 'कवरयू' (CoverYou) ने मांग की है कि पेशेवर सुरक्षा को भारत की स्वास्थ्य सेवा कार्यबल रणनीति का एक अभिन्न अंग बनाया जाए। कंपनी का मानना ​​है कि मेडिकल शिक्षा और अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ, मजबूत संस्थागत जोखिम प्रबंधन, उचित पेशेवर क्षतिपूर्ति (professional indemnity) व्यवस्था और आसानी से उपलब्ध होने वाली चिकित्सा-कानूनी सहायता भी होनी चाहिए।
'कवरयू' के सह-संस्थापक और CEO दीपांकर महाजन ने कहा, "भारत अधिक डॉक्टरों को तैयार करने में निवेश कर रहा है, लेकिन चर्चा केवल मेडिकल सीटों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। हमें यह भी पूछना चाहिए कि तब क्या होता है जब किसी डॉक्टर पर, एक जटिल अस्पताल प्रणाली के भीतर इलाज के दौरान लापरवाही का आरोप लगता है? एक क्लिनिकल निर्णय डायग्नोस्टिक रिपोर्ट, नर्सिंग देखभाल, उपकरणों, अस्पताल के प्रोटोकॉल और कई विशेषज्ञों पर निर्भर हो सकता है, फिर भी संबंधित डॉक्टर को अपने पेशेवर फैसले का बचाव करना पड़ सकता है। 
 
जवाबदेही जरूरी है, लेकिन जिम्मेदारी का आकलन निष्पक्ष रूप से होना चाहिए और सुरक्षा उपाय आधुनिक चिकित्सा पद्धति की वास्तविकताओं के अनुरूप होने चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी विवाद के शुरू होने के बाद ही डॉक्टरों को अपनी कानूनी और वित्तीय सुरक्षा की सीमाओं का पता चले।"
 
'कवरयू' 'CIA · Siya' (सिया) नाम का एक वॉयस AI-आधारित असिस्टेंट भी लाने की योजना बना रहा है। इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि डॉक्टर व्हाट्सएप वॉयस कॉल के जरिए पेशेवर क्षतिपूर्ति बीमा (professional indemnity insurance) के बारे में समझ सकें और उसे खरीद सकें। इसमें बीमा विशेषज्ञों से बात करने की सुविधा और बीमा प्रदाता के सत्यापन की प्रक्रिया भी शामिल होगी।
 
यह चुनौती केवल गलत इलाज के आरोपों तक ही सीमित नहीं है। हाल के चिकित्सा-कानूनी घटनाक्रमों से पता चलता है कि सहमति पत्रों (consent forms), ICU चार्ट, डिस्चार्ज समरी, डिजिटल रिकॉर्ड और अस्पताल प्रशासन की जांच-पड़ताल बढ़ रही है। मोबाइल रिकॉर्डिंग, CCTV फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक संचार भी महत्वपूर्ण सबूत बन सकते हैं। नतीजतन, विवाद केवल इस बात पर नहीं टिक सकते कि इलाज चिकित्सकीय रूप से उचित था या नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर कर सकते हैं कि क्या अस्पताल और डॉक्टर यह साबित कर सकते हैं कि देखभाल के स्वीकृत मानकों का पालन किया गया था।
 
यह बदलता माहौल आधुनिक अस्पतालों के लिए विशेष चुनौतियां पैदा करता है, जहां इलाज में अक्सर कई विशेषज्ञ, नर्सिंग टीमें, डायग्नोस्टिक विभाग और प्रशासक शामिल होते हैं। किसी खराब परिणाम के पीछे व्यक्तिगत क्लिनिकल निर्णय, संचार में कमी, अधूरा दस्तावेजीकरण या संस्थागत प्रणालियों में कमियां हो सकती हैं। इसलिए, जिम्मेदारी तय करने के लिए पूरी उपचार प्रक्रिया की जांच करना आवश्यक हो जाता है। फिर भी, डॉक्टरों को अस्पताल के व्यापक ढांचे के भीतर दी गई देखभाल के लिए व्यक्तिगत आरोपों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे पेशेवर और संस्थागत दायित्वों के बीच स्पष्टता होना बहुत जरूरी हो जाता है।
 
चिकित्सकों के लिए, इसके परिणाम किसी शिकायत के अंतिम नतीजे से कहीं आगे तक जा सकते हैं। लापरवाही के आरोप का बचाव करने में कानूनी प्रतिनिधित्व, पुराने मेडिकल रिकॉर्ड खोजना, विशेषज्ञों की राय लेना और अपनी क्लिनिकल जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ बार-बार कानूनी कार्यवाही में शामिल होना पड़ सकता है। भले ही लापरवाही साबित न हो, फिर भी इस प्रक्रिया से वित्तीय अनिश्चितता और प्रतिष्ठा पर दबाव पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार असफल चिकित्सा परिणाम और पेशेवर लापरवाही के बीच अंतर स्पष्ट किया है। कोर्ट ने माना है कि डॉक्टरों से उचित कौशल और देखभाल की उम्मीद की जाती है, न कि सफल इलाज की गारंटी देने की।
 
अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण बताते हैं कि कैसे संरचित सुरक्षा तंत्रों के माध्यम से पेशेवर जवाबदेही को समर्थन दिया जा सकता है। यूनाइटेड किंगडम में, डॉक्टरों के पास पर्याप्त बीमा या क्षतिपूर्ति (indemnity) व्यवस्था होनी चाहिए, जबकि NHS से जुड़ी क्लिनिकल लापरवाही की देनदारियों को संस्थागत योजनाओं के माध्यम से निपटाया जाता है। इसी तरह, ऑस्ट्रेलिया में भी चिकित्सा अभ्यास के नियमों में पेशेवर क्षतिपूर्ति व्यवस्था को शामिल किया गया है। हालांकि ये ढांचे अलग-अलग हैं, लेकिन ये सभी विवाद पैदा होने से पहले वित्तीय सुरक्षा और संस्थागत जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने के महत्व को स्वीकार करते हैं।