World Stroke Day: Tackling tobacco dependence must be part of India’s stroke prevention strategy
नई दिल्ली
भारत में स्ट्रोक और हृदय रोगों का बोझ काफी अधिक है, जिसके चलते इन बीमारियों के जोखिम कारकों (risk factors) को रोकना सार्वजनिक स्वास्थ्य की एक प्राथमिकता बन गई है। तंबाकू का सेवन इस बोझ का एक प्रमुख कारण है, जिसे रोका जा सकता है। 'विश्व स्ट्रोक दिवस' (World Stroke Day) पर, विशेषज्ञ तंबाकू नियंत्रण के लिए एक अधिक मजबूत और व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि केवल जागरूकता अभियानों से काम नहीं चलेगा; इसके बजाय निकोटीन की लत से निपटने, तंबाकू छोड़ने में मदद करने वाली सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और रोकथाम के प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीज' (Global Burden of Disease) डेटा के 2024 के विश्लेषण के अनुसार, भारत में स्ट्रोक से होने वाली मौतों में 12% योगदान तंबाकू के सेवन का है, जबकि उच्च सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (high systolic blood pressure) का योगदान 56% है। ये आंकड़े बताते हैं कि स्ट्रोक और हृदय रोगों को रोकने की व्यापक रणनीति के तहत, अन्य प्रमुख जोखिम कारकों के साथ-साथ तंबाकू के सेवन पर भी ध्यान देना जरूरी है।
नोएडा के मेदांता सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में न्यूरोसर्जरी और न्यूरोसाइंसेज के निदेशक, डॉ. यशपाल सिंह बुंदेला ने कहा, "हम लोगों से सिर्फ यह कहते रहें कि 'तंबाकू छोड़ दो' और सोचें कि समस्या हल हो गई, तो ऐसा नहीं होगा। निकोटीन की लत के कारण तंबाकू छोड़ना मुश्किल हो सकता है, भले ही लोग इसके स्वास्थ्य जोखिमों को समझते हों। तंबाकू से जुड़ी बीमारियों का बोझ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है, इसलिए हमें अभी कदम उठाने की जरूरत है।"
उन्होंने आगे कहा, "लोगों को धूम्रपान छोड़ने में मदद करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए व्यावहारिक और निरंतर सहायता सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए, साथ ही निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT) जैसे चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित साधनों तक लोगों की पहुंच होनी चाहिए। बदलाव आसान नहीं होगा, लेकिन हमें कहीं न कहीं से तो शुरुआत करनी ही होगी। केवल जागरूकता तक सीमित न रहकर, लोगों को आसानी से उपलब्ध और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित सहायता प्रदान करना, तंबाकू के सेवन को कम करने और इससे जुड़ी बीमारियों को रोकने की दिशा में एक जरूरी कदम है।" तंबाकू के सेवन का व्यापक स्तर इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य की एक तत्काल चिंता का विषय बनाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का अनुमान है कि भारत में हर साल तंबाकू के सेवन के कारण लगभग 13.5 लाख (1.35 मिलियन) लोगों की मौत होती है। भारत में तंबाकू का बोझ केवल सिगरेट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बीड़ी और बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पाद जैसे खैनी, गुटखा और जर्दा भी शामिल हैं। इस विविधता को देखते हुए, हमें ऐसी रोकथाम और तंबाकू छोड़ने की रणनीतियां बनाने की जरूरत है, जो तंबाकू सेवन के अलग-अलग तरीकों को ध्यान में रखें और सभी समुदायों के लोगों तक तंबाकू छोड़ने में मदद करने वाली सेवाएं पहुंचाएं।
तंबाकू नियंत्रण के लिए यह भी जरूरी है कि तंबाकू और निकोटीन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को स्पष्ट रूप से समझा जाए। निकोटीन की लत लग जाती है, जबकि तंबाकू जलाने से ऐसे जहरीले रसायन निकलते हैं जो हृदय संबंधी गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए, तंबाकू की लत से निपटने के लिए रोकथाम, इसे छोड़ने में प्रभावी मदद, जन-जागरूकता और निरंतर वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े फैसले सही ढंग से लिए जा सकें। तंबाकू नियंत्रण को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभव काफी काम आ सकते हैं। 2026 में प्रकाशित जापान के एक अध्ययन (जो पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है) में पाया गया कि 15-64 आयु वर्ग के लोगों में सिगरेट का उपयोग 2017 के 20.7% से घटकर 2025 में 12.3% हो गया, जबकि 'हीटेड टोबैको' (गर्म किए जाने वाले तंबाकू उत्पादों) का उपयोग 5.3% से बढ़कर 11.7% हो गया। कुल मिलाकर तंबाकू उत्पादों के उपयोग में मामूली कमी आई, जबकि एक साथ कई तरह के तंबाकू उत्पादों का उपयोग (डुअल यूज़) बढ़ गया।
ये नतीजे तंबाकू के उपयोग के बदलते तरीकों को तो दिखाते हैं, लेकिन यह साबित नहीं करते कि 'हीटेड टोबैको' के उपयोग में बढ़ोतरी के कारण सिगरेट पीने वालों की संख्या कम हुई, या इससे हृदय संबंधी बीमारियों और स्ट्रोक का दीर्घकालिक खतरा कम हुआ है। ये नतीजे इस बात पर जोर देते हैं कि हमें अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को ध्यान से देखना चाहिए और भारतीय संदर्भ में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर उनके प्रभावों का मूल्यांकन करना चाहिए।
पंजाबी बाग स्थित सी के बिड़ला अस्पताल के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के निदेशक, डॉ. विकास मित्तल कहते हैं, "सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए हमें तंबाकू नियंत्रण के पारंपरिक तरीकों से आगे सोचना होगा और उन देशों के अनुभवों से सीखना होगा जिन्होंने तंबाकू के उपयोग को कम करने में सफलता पाई है।" उन्होंने आगे कहा, "भारत में इस बात पर खुली और साक्ष्यों पर आधारित चर्चा होनी चाहिए कि क्या तंबाकू पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना बेहतर है, या फिर रोकथाम और तंबाकू छोड़ने के लिए नए और अधिक प्रभावी तरीके अपनाना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर परिणाम दे सकता है। हमारी प्राथमिकता तंबाकू की खपत को कम करने, युवाओं को इसकी शुरुआत करने से रोकने और तंबाकू का उपयोग करने वालों के लिए इसे छोड़ना आसान बनाने की होनी चाहिए। अंततः, हमारा दृष्टिकोण केवल एक ही लक्ष्य पर केंद्रित होना चाहिए: सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने और स्ट्रोक व हृदय रोगों सहित तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के बोझ को कम करने के लिए सबसे प्रभावी तरीका क्या है।" 'विश्व स्ट्रोक दिवस' के अवसर पर, स्ट्रोक और हृदय संबंधी खतरों को कम करने के लिए तंबाकू के उपयोग के साथ-साथ अन्य स्थापित जोखिम कारकों, विशेष रूप से हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) पर लगातार काम करने की आवश्यकता है।
तंबाकू छोड़ने में बेहतर मदद देना, युव