Children growing up in poverty are five times more likely to remain poor in adulthood: study
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
ऑस्ट्रेलिया में 2022-23 के दौरान 15 साल से कम उम्र के लगभग 757,000 बच्चे थे जो गरीबी में जीवनयापन कर रहे थे और यह संख्या जीलोंग, न्यूकैसल और वोलोंगोंग शहरों की कुल आबादी से भी अधिक थी।
ऑस्ट्रेलियन काउंसिल ऑफ सोशल सर्विस (एसीओएसएस)और यूएनएसडब्ल्यू सिडनी के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, यह संख्या ऑस्ट्रेलिया के प्रति छह बच्चों में से एक के बराबर है।
लेकिन बड़े होने पर इन बच्चों का भविष्य कैसा होता है? क्या गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने से होने वाले नुकसान तब खत्म हो जाते हैं, जब वे अपनी पढ़ाई पूरी कर लेते हैं, नौकरी पा लेते हैं और अपना खुद का घर बसा लेते हैं? ‘द इकोनॉमिक रिकॉर्ड’ में हाल ही में प्रकाशित हमारे अनुसंधान से ज्ञात होता है कि बचपन की गरीबी का असर लंबे समय तक बना रहता है, जो ऑस्ट्रेलिया के युवाओं को उनके 20 और 30 के दशक तक प्रभावित करता है।
गरीबी में बीते बचपन का दीर्घकालिक असर
हमने ‘हाउसहोल्ड, इनकम एंड लेबर डायनामिक्स इन ऑस्ट्रेलिया’ (एचआईएलडीए) सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल किया, जो 2001 से ऑस्ट्रेलियाई परिवारों का आकलन कर रहा है।