
पवित्र माह रमजान आत्मिक शुद्धि, अनुशासन और संयम का प्रतीक है। इस दौरान रोज़ा रखने वाले लोग सुबह सेहरी के बाद पूरे दिन बिना भोजन और पानी के रहते हैं और शाम को इफ्तार के समय रोज़ा खोलते हैं। लंबे समय तक उपवास रखने के कारण शरीर में ऊर्जा की कमी, डिहाइड्रेशन और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में सही और संतुलित आहार का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
इन्हीं विषयों पर मेरी विस्तृत बातचीत हुई Indian Medical Association हरियाणा की पूर्व अध्यक्ष Dr. Puneeta Hasija से। उन्होंने विस्तार से बताया कि रमजान के दौरान किस प्रकार का आहार अपनाना चाहिए ताकि शरीर स्वस्थ रहे और पूरे दिन ऊर्जा बनी रहे।
रमजान में संतुलित आहार क्यों जरूरी है?
डॉ. पुनीता हसीजा के अनुसार, रोज़ा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि शरीर के लिए एक शारीरिक परीक्षा भी है। जब शरीर कई घंटों तक बिना भोजन और पानी के रहता है, तो मेटाबॉलिज्म की गति धीमी हो सकती है और ऊर्जा स्तर प्रभावित हो सकता है। यदि सेहरी और इफ्तार में संतुलित भोजन नहीं लिया जाए तो कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, एसिडिटी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
वह कहती हैं कि रमजान के दौरान भोजन की गुणवत्ता मात्रा से अधिक महत्वपूर्ण है। कम लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर भोजन ही शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान कर सकता है।
सेहरी: दिनभर की ऊर्जा का आधार
सेहरी का भोजन पूरे दिन के उपवास की नींव है। डॉ. हसीजा के अनुसार सेहरी में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए जो धीरे-धीरे पचें और लंबे समय तक ऊर्जा देते रहें।
रोज़े के दौरान सबसे बड़ी चुनौती शरीर में पानी की कमी है। इसलिए सेहरी में पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना आवश्यक है।
कम से कम 2 से 3 गिलास सादा पानी अवश्य पिएं।
नारियल पानी, छाछ या लस्सी का सेवन किया जा सकता है।
हर्बल टी भी एक अच्छा विकल्प है।
इसके अलावा रसदार फल जैसे तरबूज, संतरा, सेब, पपीता, खीरा और टमाटर शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने में मदद करते हैं। खजूर भी ऊर्जा का अच्छा स्रोत है और इसे सीमित मात्रा में शामिल किया जा सकता है।
डॉ. हसीजा बताती हैं कि प्रोटीन और फाइबर से भरपूर भोजन पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है।
दाल का शोरबा
सब्जियों का सूप
हरी सब्जियों के साथ नमकीन ओट्स
दही
भीगे हुए बादाम और अन्य नट्स
ये सभी विकल्प शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं और थकान कम करते हैं।
सेहरी में रिफाइंड आटे की बजाय मल्टीग्रेन आटा, दलिया या ओट्स जैसे जटिल कार्बोहाइड्रेट का सेवन करना बेहतर होता है। ये धीरे-धीरे पचते हैं और ऊर्जा का निरंतर स्रोत बने रहते हैं।
किन चीजों से बचें?
डॉ. पुनीता हसीजा सलाह देती हैं कि सेहरी में कुछ चीजों से विशेष रूप से परहेज करना चाहिए:
अत्यधिक मसालेदार और तला-भुना भोजन
बहुत ज्यादा मीठी चीजें
जंक फूड
चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स जैसी कैफीन युक्त पेय
कैफीन शरीर से पानी की मात्रा कम कर सकता है, जिससे दिनभर अधिक प्यास लग सकती है और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।
इफ्तार: संतुलन और संयम जरूरी
दिनभर के उपवास के बाद इफ्तार के समय अक्सर लोग ज्यादा भोजन कर लेते हैं, जिससे पेट में भारीपन और अपच की समस्या हो सकती है। डॉ. हसीजा के अनुसार इफ्तार की शुरुआत हल्के और सुपाच्य भोजन से करनी चाहिए।
सबसे पहले पानी और 1-2 खजूर लें।
इसके बाद सूप या सलाद शामिल करें।
मुख्य भोजन में संतुलित मात्रा में रोटी, दाल, सब्जी और सलाद लें।
तले हुए और अत्यधिक ऑयली खाद्य पदार्थों को सीमित रखें।
वह सलाह देती हैं कि इफ्तार के बाद भी पानी की पर्याप्त मात्रा लें ताकि शरीर में तरल संतुलन बना रहे।
विशेष समूहों के लिए सावधानियां
डॉ. हसीजा का कहना है कि हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है।
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को रोज़ा रखने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
बच्चों के लिए भी संतुलित और पौष्टिक आहार जरूरी है, हालांकि छोटे बच्चों को लंबा उपवास रखने की सलाह नहीं दी जाती।
डॉ. पुनीता हसीजा के अनुसार रमजान के दौरान सही खानपान अपनाकर न केवल कमजोरी और डिहाइड्रेशन से बचा जा सकता है, बल्कि यह महीना शरीर को संतुलित जीवनशैली की ओर प्रेरित भी करता है। संयम, संतुलन और सही पोषण — यही स्वस्थ रोज़े की कुंजी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी विशेष स्वास्थ्य समस्या या स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।