आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रौद्योगिकियों को शामिल कर पिछले चार वर्षों में अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में मौलिक रूप से बदलाव किया है, ताकि विशेषज्ञों की कमी दूर करने के साथ-साथ सक्रिय देखभाल का दायरा बढ़ाया जा सके।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शुरू किए गए विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों में अपनाई गई एआई आधारित प्रौद्योगिकियां पूरे भारत में स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञता को सुलभ बना रही हैं।
बयान के मुताबिक, एआई आधारित प्रौद्योगिकियों को राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, राष्ट्रीय मधुमेह रेटिनोपैथी स्क्रीनिंग कार्यक्रम और ‘मीडिया रोग निगरानी प्रणाली’ में शामिल करके सरकार ने गैर-विशेषज्ञों को उच्च स्तरीय जांच एवं निदान में सक्षम बनाया है, जिससे तपेदिक (टीबी) के 4,500 से अधिक मामलों की पहचान की जा सकी है और इलाज के नकारात्मक परिणामों में 27 फीसदी की कमी लाना संभव हुआ है।
इसमें कहा गया है कि ‘ई-संजीवनी’ और उद्योगयंत्र एआई प्रणाली के जरिये इस बदलाव को और भी मजबूती मिली है।
बयान के अनुसार, ई-संजीवनी के तहत जहां एआई-आधारित निदान के जरिये 28.2 मामलों में चिकित्सकीय परामर्श दिया है, उद्योगयंत्र एआई प्रणाली से कुपोषण पर नजर रखने में मदद मिली है।
इसमें कहा गया है कि एआई आधारित प्रौद्योगिकियों को शामिल किए जाने से एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हुआ है, जो संक्रामक रोगों के प्रबंधन और कैंसर की देखभाल से लेकर पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा के आधुनिकीकरण तथा राष्ट्रीय एक स्वास्थ्य मिशन तक फैला हुआ है।