आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
शोध के अनुसार, MRAP2 नामक प्रोटीन अकेले काम नहीं करता, बल्कि यह MC3R नाम के एक अन्य प्रोटीन को सक्रिय रखने में मदद करता है। MC3R यह तय करता है कि शरीर ऊर्जा को खर्च करेगा या उसे वसा के रूप में जमा करेगा। जब MRAP2 सही ढंग से काम नहीं करता, तो भूख से जुड़े संकेत कमजोर पड़ सकते हैं और शरीर का ऊर्जा संतुलन बिगड़ सकता है।
इससे पहले के अध्ययनों में पाया गया था कि MRAP2, MC4R नामक प्रोटीन के लिए भी जरूरी है, जो भूख को नियंत्रित करता है। नए शोध में यह समझने की कोशिश की गई कि क्या MRAP2, MC3R को भी उसी तरह सहयोग देता है। सेल मॉडल पर किए गए प्रयोगों में देखा गया कि जब दोनों प्रोटीन बराबर मात्रा में मौजूद थे, तो कोशिकीय संकेत मजबूत हो गए।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जिन लोगों में MRAP2 में आनुवंशिक बदलाव होते हैं, उनमें मोटापे का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में यह प्रोटीन MC3R को सही तरह से सक्रिय नहीं कर पाता, जिससे भूख और ऊर्जा संतुलन प्रभावित होता है।
मुख्य शोधकर्ता डॉ. कैरोलिन गॉरविन के अनुसार, यह खोज मोटापे के आनुवंशिक कारणों को समझने और भविष्य में नई दवाओं के विकास का रास्ता खोल सकती है। इससे ऐसी दवाएं विकसित हो सकती हैं, जो पेट भरे होने का एहसास बढ़ाकर ज्यादा खाने की आदत को कम करने में मदद करें।




