South Asia faces the biggest shortage of health workers to achieve health coverage: Study
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
दुनिया भर में औसत सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज हासिल करने के लिए लगभग 3.44 करोड़ अतिरिक्त चिकित्सकों, नर्सों, ‘मिडवाइफ’, दंत चिकित्सकों और फार्मासिस्ट की जरूरत है।
‘द लांसेट पब्लिक हेल्थ’ पत्रिका में छपे एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार स्वास्थ्यकर्मियों की सबसे अधिक कमी दक्षिण एशिया और उप-सहारा अफ्रीका में पाई गई है।
अध्ययन में यह सामने आया है कि भारत में प्रति 10,000 की आबादी पर लगभग 73 स्वास्थ्यकर्मी हैं। प्रति 10,000 आबादी पर 10.5 डॉक्टर, 10.8 नर्स, 8.1 फार्मासिस्ट और फार्मास्युटिकल असिस्टेंट, और 1.2 मिडवाइफ कर्मचारी हैं।
अमेरिका की वाशिंगटन विश्वविद्यालय के ‘इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन’ के शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि चीन में प्रति 10,000 आबादी पर करीब 130 स्वास्थ्यकर्मी हैं। इनमें 30 से अधिक डॉक्टर और करीब 45 नर्स शामिल हैं।
विश्लेषण में पाया गया कि दुनियाभर में स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या 1990 से 2023 के बीच करीब तीन गुना यानी 4.09 करोड़ से बढ़कर 12.21 करोड़ हो गई। इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक रही और 2023 में कुल स्वास्थ्यकर्मियों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत थी।