लू से बच्चों और किशोरों का मानसिक स्वास्थ्य सबसे अधिक प्रभावित : समीक्षा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 10-08-2026
Heatwaves most affect children and adolescents' mental health: study
Heatwaves most affect children and adolescents' mental health: study

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
तापमान, लू और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध पर किये गए वैश्विक अध्ययन की समीक्षा से पता चला है कि पांच से 18 साल की उम्र के बच्चे और किशोर सबसे ज्यादा जोखिम वाले आयुवर्ग में हैं।

‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी’ में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि तापमान में प्रत्येक एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के साथ बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी प्रतिकूल समस्याओं का खतरा लगभग एक प्रतिशत बढ़ जाता है।
 
ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के ‘कॉलेज ऑफ मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ’ में महामारी विज्ञानी और एसोसिएट प्रोफेसर तथा अध्ययन की सह-लेखिका जैकलीन स्टीफंस ने कहा, “ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से बच्चे जलवायु में होने वाले बदलावों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ये बदलाव सामाजिक और विकास संबंधी तनाव से जुड़े होते हैं, जिनमें घर से बाहर की गतिविधियों में बाधा, उनकी शिक्षा और मनोरंजन के अवसरों पर असर शामिल हैं।”
 
स्टीफंस ने कहा, “किशोरावस्था मानसिक स्वास्थ्य के विकास का एक संवेदनशील दौर होता है जिससे अत्यधिक गर्मी के प्रभावों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है। अधिक तापमान का संबंध बच्चों में सीखने की क्षमता और शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट से भी पाया गया है।”
 
शोधकर्ताओं ने 23 वैश्विक अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह भी पाया कि लू के दौरान खराब मानसिक स्वास्थ्य का जोखिम 25 प्रतिशत और ज्यादा तापमान में 1.5 प्रतिशत बढ़ जाता है।
 
लेखकों ने लिखा, “पांच से 18 साल की उम्र के बच्चे सबसे ज्यादा जोखिम में थे; ज्यादा तापमान के कारण उनमें जोखिम 1.5 प्रतिशत और लू के दौरान 25 प्रतिशत बढ़ गया।”
 
स्टीफंस ने कहा, “इसके असर में गर्म रातों में नींद में खलल पड़ना शामिल हो सकता है जिससे सेहत और भावनाओं को संभालने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। साथ ही, माता-पिता की मानसिक सेहत, देखभाल का तनाव और परिवार में झगड़े जैसे अप्रत्यक्ष असर भी हो सकते हैं। ये सभी चीजें लू और खराब मौसम की घटनाओं के दौरान बढ़ जाती हैं, जो अब आम होती जा रही हैं।”
 
शोध करने वालों का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि जलवायु-अनुकूलन की कोशिशों में मानसिक स्वास्थ्य को शामिल करने और बच्चों व युवाओं के लिए खास उपाय करने की जरूरत है।