अर्सला खान
सफलता की परिभाषा अक्सर बड़ी कंपनियों, शानदार आंकड़ों और ऊंचे पदों से तय होती है। लेकिन कुछ लोग इस परिभाषा को थोड़ा बदल देते हैं। वे सिर्फ मुनाफा कमाने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज के हर एक कोने में रोशनी फैलाने का काम करते हैं। हम बात कर रहे हैंशबाना फैज़लकी।
वह सिंगापुर की दिग्गज कंपनी केएफ होल्डिंग्स (KEF Holdings) की सह-संस्थापक और वाइस चेयरपर्सन हैं। इसके साथ ही वह फैज़ल एंड शबाना फाउंडेशन के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में एक शांत क्रांति ला रही हैं। उनका यह पूरा सफर इस बात की गवाही देता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो महिलाएं परिवार और कारोबार दोनों मोर्चों पर एक साथ इतिहास रच सकती हैं।
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छोटे कारोबार से शुरू हुआ सपनों का सफर
शबाना फैज़ल के पति फैज़ल ई. कोटिकोलोन इस कंपनी के संस्थापक और चेयरमैन हैं। केएफ होल्डिंग्स का कारोबार इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक तकनीक से निर्माण, शिक्षा, खेती और मेटल जैसे कई बड़े क्षेत्रों में फैला हुआ है। लेकिन इस विशाल समूह की शुरुआत बहुत ही साधारण तरीके से हुई थी। साल 1995 में संयुक्त अरब अमीरात में एक छोटी-सी स्क्रैप मेटल ट्रेडिंग और रीसाइक्लिंग कंपनी के रूप में इसकी नींव रखी गई थी।
वक्त के साथ मेहनत रंग लाई और कारोबार का दायरा बढ़ता गया। कंपनी ने आधुनिक तकनीक को अपनाकर निर्माण के नए तौर-तरीके विकसित किए। साल 2014 में इस ग्रुप ने भारत में अपने अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के तहत पंद्रह सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी निवेश करने की घोषणा की थी। यह इस बात का सबूत था कि कंपनी देश के विकास में अपना पूरा योगदान देने के लिए तैयार है।

पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में बनाई अपनी जगह
शबाना फैज़ल का शुरुआती सफर आसान नहीं था। उन्होंने अपनी जिंदगी के शुरुआती दौर में उस स्टील मिल में भी काम किया, जहां महिलाओं की मौजूदगी न के बराबर हुआ करती थी। उन्होंने डेटा एंट्री जैसे काम भी किए और हर चुनौती का डटकर सामना किया। उन्होंने मैंगलोर के सेंट एग्नेस कॉलेज से मनोविज्ञान की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दुबई के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइन से फैशन डिजाइन और मर्चेंडाइजिंग में डिप्लोमा हासिल किया।
शादी के बाद उनके चार बच्चे हुए। घर-परिवार की ढेरों जिम्मेदारियां थीं, लेकिन उनके भीतर कुछ नया करने की छटपटाहट कभी कम नहीं हुई। जब उनके पति की कंपनी ने शारजाह में एक बड़ी मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री शुरू की, तो शबाना ने उसके इंटीरियर डिजाइन में हाथ बंटाने की इच्छा जताई। यहीं से उनके पेशेवर जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ।

कर्मचारियों के लिए मिसाल बनीं शबाना
कारोबार में कदम रखने के बाद उन्होंने कंपनी के ह्यूमन रिसोर्स यानी मानव संसाधन विभाग को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाली। उनकी सोच बहुत साफ थी। उनका मानना था कि किसी भी कंपनी की असली ताकत उसकी मशीनें नहीं, बल्कि उसके कर्मचारी होते हैं।
उन्होंने कर्मचारियों के लिए एक खास कम्युनिटी सेंटर बनवाया। इस सेंटर की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वहां काम करने वाले किसी भी स्तर के कर्मचारी के साथ कोई भेदभाव नहीं होता था। चाहे कोई फैक्ट्री में मजदूरी कर रहा हो या किसी बड़े पद पर बैठा हो, सभी के लिए खाने और दूसरी सुविधाएं एक जैसी थीं। इसके साथ ही कर्मचारियों को नई स्किल्स, अंग्रेजी सीखने, स्वास्थ्य और साफ-सफाई से जुड़ी जरूरी बातें भी सिखाई जाती थीं।
समाज सेवा को बनाया अपनी जिंदगी का मकसद
शबाना फैज़ल मानती हैं कि जिन लोगों के पास समाज की भलाई करने की क्षमता है, उन्हें पीछे नहीं हटना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर समाज सेवा के कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए। फैज़ल एंड शबाना फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेमिसाल काम किए।
केरल के माहे में के सफिया ऑटिज्म सेंटर को मदद देना और कोझिकोड के नदक्कावु स्थित सरकारी बालिका स्कूल की तस्वीर बदलना इसी सोच का नतीजा था। जब उनकी टीम ने उस सरकारी स्कूल का जिम्मा लिया, तो वहां बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव था।
दो हजार छात्राओं वाले उस स्कूल में केवल नौ शौचालय काम कर रहे थे। उन्होंने स्कूल की पूरी इमारत को सुधारा, प्रयोगशालाएं बनवाईं और शिक्षकों को आधुनिक ट्रेनिंग दी। इस बदलाव का सीधा असर यह हुआ कि स्कूल में बच्चों की उपस्थिति तेजी से बढ़ी और परीक्षा के नतीजे भी बेहतरीन आने लगे।
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भरोसा काम से बनता है
हर अच्छे काम की तरह इस सफर में भी मुश्किलें आईं। शुरुआत में जब उन्होंने समाज सेवा के काम शुरू किए, तो लोगों के मन में अविश्वास था। लेकिन शबाना मानती हैं कि जब काम का असर जमीन पर दिखाई देता है, तो लोगों का भरोसा अपने आप बन जाता है।
वह कहती हैं कि देश को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और निजी कंपनियों को मिलकर काम करना होगा। समाज के आम लोगों को भी इसमें अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उनकी फाउंडेशन ने न सिर्फ गरीब छात्रों की पढ़ाई में मदद की, बल्कि स्तन कैंसर और अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़े मेडिकल रिसर्च में भी दिल खोलकर सहयोग दिया।
महिलाओं के लिए एक मजबूत प्रेरणा
शबाना फैज़ल की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक रोशनी की किरण है जो परिवार की सीमाओं में बंधकर अपने सपनों को भूल जाती हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर लगन सच्ची हो, तो एक महिला अपने घर-परिवार को संभालने के साथ-साथ दुनिया के सबसे बड़े बिजनेस और समाज सुधार के कामों को भी बखूबी संभाल सकती है।
असली सफलता सिर्फ बैंक बैलेंस बढ़ाने में नहीं है, बल्कि तब मिलती है जब आपकी वजह से किसी दूसरे की जिंदगी संवर जाए। शबाना फैज़ल का पूरा जीवन इस बात की सबसे बड़ी मिसाल है कि कारोबार और इंसानियत एक साथ चलकर समाज में एक खूबसूरत बदलाव ला सकते हैं।