एम्स दिल्ली में 460 से अधिक फैकल्टी पदों पर भर्ती परिणाम घोषित, चयन ब्लॉकचेन का इस्तेमाल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 06-07-2026
Recruitment results declared for over 460 faculty positions at AIIMS Delhi; blockchain technology used in the selection process.
Recruitment results declared for over 460 faculty positions at AIIMS Delhi; blockchain technology used in the selection process.

 

नई दिल्ली:

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली ने 460 से अधिक रिक्त फैकल्टी पदों पर भर्ती प्रक्रिया के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इन पदों में असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर स्तर तक की नियुक्तियां शामिल हैं। चयन प्रक्रिया एम्स नई दिल्ली और मैदानगढ़ी स्थित एम्स-सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS-CAPFIMS) परिसर के लिए आयोजित की गई थी।

एम्स द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी फैकल्टी भर्ती प्रक्रियाओं में से एक है। भर्ती के तहत एम्स नई दिल्ली में 265 पदों और एम्स-सीएपीएफआईएमएस परिसर में 199 पदों के लिए चयन किया गया। इन पदों के लिए देशभर से 3,200 से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।

संस्थान के अनुसार, पूरी भर्ती प्रक्रिया लगभग छह महीने में पूरी की गई और इसमें पारदर्शिता तथा गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए पहली बार ब्लॉकचेन डिजिटल तकनीक का उपयोग किया गया। एम्स का कहना है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से चयन प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया गया।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अभ्यर्थियों के प्राप्तांक (मार्क्स) को वन-टाइम पासवर्ड (OTP) के माध्यम से डिजिटल रूप से सुरक्षित किया गया, जिससे चयन प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो गई। इसके बाद पूर्व निर्धारित मानकों और एल्गोरिदम के आधार पर सॉफ्टवेयर ने स्वतः अंतिम मेरिट सूची तैयार की। संस्थान ने स्पष्ट किया कि टाई की स्थिति को छोड़कर पूरी मेरिट सूची तैयार करने में किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप नहीं किया गया।

एम्स ने कहा कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से न केवल चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ी, बल्कि अंतिम परिणाम भी अपेक्षाकृत कम समय में घोषित किए जा सके। संस्थान का मानना है कि नई नियुक्तियों से फैकल्टी की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं, छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और शोध गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

इस बीच, एम्स नई दिल्ली ने हाल ही में अपने छात्रों, रेजिडेंट डॉक्टरों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया उपयोग संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। 26 जून को जारी इन दिशानिर्देशों में संस्थान के नाम, लोगो और ब्रांडिंग का डिजिटल या प्रिंट माध्यमों पर बिना अनुमति उपयोग करने पर रोक लगाई गई है।

एम्स के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित ये दिशानिर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। इनका पालन स्नातक, स्नातकोत्तर, सुपर स्पेशियलिटी और पीएचडी कार्यक्रमों के विद्यार्थियों, मान्यता प्राप्त छात्र संगठनों, फैकल्टी सदस्यों, शोधकर्ताओं, प्रशासनिक कर्मचारियों, विभिन्न विभागों, संस्थागत निकायों और एम्स से जुड़े बाहरी सहयोगी संगठनों को भी करना होगा।

संस्थान का कहना है कि इन नए नियमों का उद्देश्य एम्स की आधिकारिक पहचान और विश्वसनीयता की रक्षा करना, संस्थान के नाम के अनधिकृत उपयोग को रोकना तथा सोशल मीडिया पर जिम्मेदार और पेशेवर आचरण को बढ़ावा देना है।

एम्स का मानना है कि बड़े पैमाने पर की गई नई फैकल्टी नियुक्तियां और प्रशासनिक सुधार भविष्य में संस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान क्षमता को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।