आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
एक नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क के अत्यंत घातक कैंसर ग्लियोब्लास्टोमा (GBM) के इलाज के लिए विटामिन B12 पर आधारित एक नई थेरेपी को आशाजनक बताया है। यह शोध ऑनकोसाइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन का नेतृत्व जोसेफ ए. बाउर और उनकी टीम ने किया। शोधकर्ताओं ने नाइट्रोसिलकोबालामिन (NO-Cbl) नामक विटामिन B12 के एक संशोधित रूप का परीक्षण किया, जो शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड छोड़ता है। उनका उद्देश्य यह जानना था कि क्या यह यौगिक मस्तिष्क की सुरक्षा परत ब्लड-ब्रेन बैरियर (BBB) को पार कर सीधे ट्यूमर तक पहुंच सकता है।
ग्लियोब्लास्टोमा मस्तिष्क कैंसर के सबसे घातक और उपचार-प्रतिरोधी रूपों में से एक है। सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी के बावजूद मरीजों की औसत जीवित रहने की अवधि 15 महीने से भी कम रहती है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि ब्लड-ब्रेन बैरियर कई दवाओं को मस्तिष्क के ट्यूमर तक पहुंचने से रोक देता है।
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने चूहों और मानव कैंसर कोशिकाओं पर विभिन्न परीक्षण किए। परिणामों से पता चला कि NO-Cbl न केवल ब्लड-ब्रेन बैरियर को सफलतापूर्वक पार करता है, बल्कि ग्लियोब्लास्टोमा ऊतकों में चयनात्मक रूप से जमा भी हो जाता है। ट्यूमर में नाइट्रेट का स्तर कम से कम 24 घंटे तक ऊंचा बना रहा, जबकि सामान्य ऊतकों में यह तेजी से घट गया।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि जब NO-Cbl को मौजूदा उपचारों टेमोजोलोमाइड और TRAIL के साथ मिलाकर प्रयोग किया गया, तो कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को अकेले उपचार की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी ढंग से रोका जा सका।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह प्रारंभिक अध्ययन दर्शाता है कि NO-Cbl मस्तिष्क तक पहुंचने, ट्यूमर में जमा होने और मौजूदा उपचारों की प्रभावशीलता बढ़ाने की क्षमता रखता है। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए आगे और व्यापक शोध की आवश्यकता होगी।