आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उत्तरी क्वींसलैंड के वर्षावनों में वैज्ञानिकों ने मकड़ी की एक नई प्रजाति की खोज की है, जिसने शिकार करने की बेहद अनोखी तकनीक विकसित की है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह मकड़ी स्प्रिंग की तरह काम करने वाले रेशमी जाल का इस्तेमाल कर केवल एक विशेष प्रकार की चींटी का शिकार करती है। इसकी इसी खास क्षमता के कारण इसे ‘बैलिस्टा स्पाइडर’ नाम दिया गया है, जिसका नाम प्राचीन रोमन युद्धक हथियार बैलिस्टा से प्रेरित है।
यह छोटी और निशाचर मकड़ी ग्रीन ट्री एंट (ओएकोफिला स्मैराग्डिना) को पकड़ने में विशेषज्ञ है। इसका विस्तृत अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका करंट बायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। हालांकि इस प्रजाति को अभी औपचारिक नाम नहीं दिया गया है, लेकिन यह प्रोपोस्टिरा वंश से संबंधित है।
मैक्वेरी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अजय नरेंद्र और शोध छात्र प्रणव जोशी के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने वर्षावन में 10 दिन और रात बिताकर इस मकड़ी के व्यवहार का अध्ययन किया। हाई-स्पीड और इन्फ्रारेड कैमरों की मदद से इसके शिकार करने की प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया गया।
दिन के समय यह मकड़ी पत्तों के नीचे छिपी रहती है। रात होने पर यह नीचे उतरकर कई घंटों तक रेशम से एक विशेष शंकु आकार का जाल तैयार करती है। जब कोई ग्रीन ट्री एंट इस संरचना को काटती है, तो जाल का तंत्र सक्रिय हो जाता है और चींटी को 30 सेंटीमीटर से अधिक ऊंचाई तक उछालकर मुख्य जाल में फंसा देता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि मकड़ी जाल के अंतिम चरण में ऐसा रासायनिक संकेत छोड़ती है जो चींटियों को आकर्षित करता है और उन्हें हमला करने के लिए उकसाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह संभवतः पहला ज्ञात उदाहरण है जहां किसी मकड़ी का जाल केवल एक ही शिकार प्रजाति को पकड़ने के लिए विकसित हुआ है और जाल का तंत्र शिकारी नहीं बल्कि शिकार द्वारा सक्रिय किया जाता है। यह खोज प्रकृति में विशेषीकृत शिकार रणनीतियों की एक अनोखी मिसाल मानी जा रही है।