आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
ऑस्ट्रेलिया में दिसंबर 2025 में सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू होने से पहले इसके संभावित नकारात्मक प्रभावों को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी।
इन चिंताओं में यह आशंका भी शामिल थी कि किशोरों का समाचार पढ़ना कम हो जाएगा। चूंकि अधिकतर युवा समाचारों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं और कई उसी पर निर्भर हैं, इसलिए यह आशंका वास्तविक मानी जा रही थी।
अब, प्रतिबंध लागू होने के कुछ महीनों बाद प्रकाशित हमारे नए अध्ययन में पाया गया है कि जिन युवाओं पर इस प्रतिबंध का असर अधिक पड़ा, उनके यह कहने की संभावना भी अधिक रही कि उन्हें पहले की तुलना में कम समाचार मिल रहे हैं और उनके पास समाचारों तथा अपने लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के अवसर भी कम हो गए हैं।
अध्ययन के निष्कर्ष
फरवरी में हमने 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 1,027 युवाओं का सर्वेक्षण किया। यह सर्वेक्षण उस दीर्घकालिक अध्ययन का हिस्सा था, जिसमें 2017 से ऑस्ट्रेलियाई युवाओं की समाचारों में रुचि और भागीदारी का अध्ययन किया जा रहा है।
सर्वेक्षण में युवाओं से पूछा गया कि सोशल मीडिया प्रतिबंध का उनके सोशल मीडिया इस्तेमाल और समाचारों से जुड़ाव पर क्या असर पड़ा।
सबसे पहले हमने यह जानने का प्रयास किया कि क्या प्रतिबंध ने युवाओं के सोशल मीडिया इस्तेमाल को प्रभावित किया है। इसके लिए उनसे पूछा गया कि प्रतिबंधित मंचों के उपयोग में कोई बदलाव आया या नहीं और यदि आया तो क्या उन्होंने उनका इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया या सिर्फ कम कर दिया।
अध्ययन में पाया गया कि प्रतिबंधित मंचों का इस्तेमाल करने वाले 16 वर्ष से कम आयु के 61 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि उनके सोशल मीडिया इस्तेमाल में बहुत कम या कोई बदलाव नहीं आया। यानी अधिकतर युवाओं के लिए यह प्रतिबंध प्रभावी साबित नहीं हुआ।