नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित अनियमितताओं की CBI या स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करेगा। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने वकील सत्यम सिंह राजपूत के ज़रिए यह याचिका दायर की है। इसमें परीक्षा के आयोजन और मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने की मांग की गई है।
PIL में कहा गया है, "याचिका में JPSC द्वारा 19 अप्रैल, 2026 को आयोजित परीक्षा (जिसे 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी कहा जाता है) से जुड़ी कथित अनियमितताओं की CBI से स्वतंत्र, निष्पक्ष, व्यापक और समयबद्ध जांच की मांग की गई है।" यह याचिका 2 जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे घोषित होने के बाद हुए विवाद के बीच दायर की गई है। याचिका के अनुसार, एक सफल उम्मीदवार की OMR उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी बाद में वायरल हो गई, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे।
कथित अनियमितताओं के कारण रांची में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। याचिकाकर्ता का दावा है कि उम्मीदवार को योग्य घोषित किया गया, जबकि उसने कथित तौर पर पेपर I में 100 में से केवल 48 सवालों के जवाब दिए थे। CBI जांच के अलावा, याचिका में एक स्वतंत्र समिति के गठन की भी मांग की गई है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या झारखंड के बाहर के किसी हाई कोर्ट के रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश/जज करें।
याचिका में कहा गया है कि प्रस्तावित समिति में फोरेंसिक साइंस, सूचना प्रौद्योगिकी, परीक्षा सुरक्षा, OMR मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञ शामिल होंगे। याचिकाकर्ता ने OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम-निर्माण प्रणालियों के स्वतंत्र ऑडिट की भी मांग की है। साथ ही, यह तय करने की भी मांग की है कि क्या अनियमितताओं से कथित तौर पर प्रभावित उम्मीदवारों को निष्पक्ष रूप से "दागी" (tainted) और "बेदाग" (untainted) श्रेणियों में अलग किया जा सकता है।
याचिका में JPSC, सरकारी अधिकारियों और इस प्रक्रिया में शामिल सभी एजेंसियों, ठेकेदारों, सेवा प्रदाताओं और परीक्षा-केंद्र के कर्मचारियों को परीक्षा से जुड़े सभी फिजिकल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। याचिका के अनुसार, इन रिकॉर्ड्स में ओरिजिनल OMR शीट, कैंडिडेट की कार्बन कॉपी, प्रश्न-पत्र, आंसर की, अटेंडेंस शीट, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, परीक्षा-केंद्र की रिपोर्ट, स्कैनिंग रिकॉर्ड, मूल्यांकन का डेटा और रिजल्ट बनाने का डेटा, और इनसे जुड़े अन्य दस्तावेज़ शामिल होने चाहिए।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह कोर्ट द्वारा मंज़ूर किए गए सुरक्षा उपायों के तहत एक नई प्रारंभिक परीक्षा कराने का आदेश दे। झारखंड हाई कोर्ट ने 20 अगस्त को राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं के ज़रिए भर्ती किए गए सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द कर दी गई थी।
18 अगस्त को झारखंड सरकार ने कथित अनियमितताओं को लेकर हफ़्तों तक चले सार्वजनिक विरोध के बाद 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं सहित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का नोटिफिकेशन जारी किया था।
कोर्ट का यह आदेश सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ नए नियुक्त अधिकारियों द्वारा दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया।