नई दिल्ली
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के हिंदी विभाग में सोमवार को ‘एंटी-रैगिंग वीक’ के तहत विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर को सुरक्षित, सौहार्दपूर्ण और रैगिंग-मुक्त वातावरण में बदलने के लिए विद्यार्थियों को जागरूक करना था। इसमें नवागंतुक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के दौरान हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. नीरज कुमार, विभाग के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने नए छात्रों का स्वागत किया। नवागंतुक विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया गया कि विश्वविद्यालय परिसर में उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
रैगिंग के खिलाफ जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष और शिक्षकों ने विद्यार्थियों को रैगिंग के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रैगिंग केवल कानूनी रूप से अपराध ही नहीं है, बल्कि इसका छात्र के मानसिक और भावनात्मक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
शिक्षकों ने नए विद्यार्थियों से अपील की कि वे किसी भी तरह के डर या दबाव में आए बिना अपनी पढ़ाई और व्यक्तित्व विकास पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रत्येक विद्यार्थी को सम्मान और सुरक्षा के साथ अध्ययन करने का अधिकार है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि रैगिंग जैसी किसी भी गतिविधि को सामान्य परंपरा या मनोरंजन का हिस्सा नहीं समझना चाहिए। इसके खिलाफ विद्यार्थियों और शिक्षकों को मिलकर जागरूकता पैदा करनी चाहिए।
परिसर में निकाली गई जागरूकता रैली
एंटी-रैगिंग अभियान के तहत हिंदी विभाग के छात्रों और शिक्षकों ने विश्वविद्यालय परिसर में जागरूकता रैली भी निकाली। रैली में विद्यार्थियों ने हाथों में एंटी-रैगिंग संदेशों वाली तख्तियां और बैनर ले रखे थे।
इस दौरान छात्रों ने “रैगिंग एक अपराध है” और “सुरक्षित कैंपस, समृद्ध भविष्य” जैसे नारों के माध्यम से पूरे परिसर में रैगिंग के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया।
रैली का उद्देश्य केवल नए विद्यार्थियों को रैगिंग से बचाव के प्रति जागरूक करना नहीं था, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय समुदाय को यह संदेश देना भी था कि सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण तैयार करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
सुरक्षित माहौल के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता
कार्यक्रम के संयोजक और हिंदी समिति के सलाहकार डॉ. हैदर अली ने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से हिंदी विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षक और छात्र समुदाय मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जहां प्रत्येक नया विद्यार्थी स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सके।
उन्होंने कहा कि नए विद्यार्थियों का विश्वविद्यालय में पहला अनुभव उनके आगे के शैक्षणिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसलिए उन्हें भयमुक्त और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है।
कार्यक्रम में प्रो. हेमलता महिश्वर, प्रो. इंदु वीरेंद्रा, डॉ. नूरुद्दीन परवेज, डॉ. मनीष तोमर और डॉ. अब्दुल हाशिम सहित विभागीय सहायक जुहैब शबाब, मोहम्मद साबिर और राशिद सैफी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से हिंदी विभाग ने रैगिंग के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए विद्यार्थियों से सुरक्षित, सम्मानजनक और सौहार्दपूर्ण परिसर बनाने में सक्रिय सहयोग की अपील की।