अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नैमा खातून ने युवाओं से अपनी ऊर्जा को ज्ञान, क्षमता और सार्थक कार्य में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित और मानवीय भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।
ऐतिहासिक स्ट्रेची हॉल में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद कुलपति ने इस वर्ष की थीम ‘विकसित भारत 2047 के लिए युवा शक्ति’ का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की आजादी की पहली पीढ़ी के सामने सवाल था कि भारत को आजाद कैसे कराया जाए, जबकि आज की पीढ़ी को यह तय करना है कि इस आजादी से देश को क्या बनाया जाए।
युवाओं को ज्ञान और नवाचार से जोड़ने पर जोर
प्रो. नैमा खातून ने कहा कि विकसित भारत की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना उसके युवाओं की बौद्धिक क्षमता होगी। विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच, कल्पनाशीलता, नैतिक निर्णय क्षमता और जटिल समस्याओं को हल करने का साहस विकसित करना चाहिए।
सर सैयद अहमद खान की शिक्षा संबंधी सोच का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एएमयू को ऐसा संस्थान बनना चाहिए जो विद्यार्थियों को केवल रोजगार हासिल करने के लिए तैयार न करे, बल्कि उन्हें दूसरों के लिए अवसर पैदा करने में भी सक्षम बनाए। उन्होंने इसे युवा ऊर्जा से युवा नेतृत्व और सक्रिय भागीदारी की ओर बढ़ने की प्रक्रिया बताया।
एआई से मेडिकल रिसर्च तक एएमयू की उपलब्धियां
कुलपति ने कहा कि एएमयू अपनी समृद्ध परंपराओं और भविष्य की नई तकनीकों के बीच खड़ा है। विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, उन्नत चिकित्सा अनुसंधान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, जियोस्पेशियल रिसर्च और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में काम हो रहा है।
उन्होंने एएमयू के ग्रीन कैंपस अभियान का भी उल्लेख किया और कहा कि विकसित भारत केवल तकनीकी रूप से उन्नत नहीं, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी टिकाऊ होना चाहिए।
प्रो. खातून ने बताया कि वर्ष 2025-26 में जेएन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कई लाख ओपीडी विजिट, 1.28 लाख से अधिक दाखिले तथा 32 हजार से अधिक बड़ी और छोटी सर्जरी हुईं। इसके अलावा इंटरडिसिप्लिनरी पीडियाट्रिक कार्डियक सेंटर में 200 हृदय संबंधी सर्जरी और प्रक्रियाएं की गईं।
गलत सूचना और एआई के दौर में सतर्क रहने की सलाह
कुलपति ने विद्यार्थियों को गलत सूचना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जलवायु परिवर्तन जैसी मौजूदा चुनौतियों के प्रति सचेत किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को किसी सूचना पर तुरंत विश्वास करने के बजाय पढ़ने, जांचने, तुलना करने और सत्यापन की आदत विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने ऐसे एएमयू की कल्पना की, जहां युवा बौद्धिक जोखिम लेने और नए प्रयोग करने से न डरें तथा नवाचार केवल कभी-कभार होने वाली गतिविधि नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की संस्कृति बने।
उन्होंने कहा कि भविष्य के एएमयू स्नातक ऐसे पेशेवर होने चाहिए जो एआई के साथ काम करें, लेकिन अपनी मानवीय बुद्धिमत्ता को उसके हवाले न करें। वैज्ञानिक समाज को समझें, उद्यमी अपनी जिम्मेदारी को समझें और नागरिक असहमति के बावजूद नफरत से दूर रहें।
पौधारोपण और बीमार छात्रों से मुलाकात
कार्यक्रम का संचालन एएमयू के रजिस्ट्रार प्रो. आसिम जफर ने किया। कुलपति के साथ प्रो-वाइस चांसलर प्रो. एम. मोहसिन खान, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. एम. अथर अंसारी, प्रॉक्टर प्रो. एम. नावेद खान सहित अन्य अधिकारियों ने समारोह में हिस्सा लिया।
कुलपति ने सर सैयद हॉल्स के दक्षिण और उत्तर परिसर में पौधे लगाए तथा यूनिवर्सिटी हेल्थ सर्विस में बीमार छात्रों को फल वितरित किए।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर उर्दू विभाग ने यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक के असेंबली हॉल में मुशायरे का आयोजन भी किया। समारोह के दौरान एएमयू की प्रमुख इमारतों—एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक, मौलाना आजाद लाइब्रेरी, विक्टोरिया गेट, बाब-ए-सैयद और आर्ट्स फैकल्टी—को तिरंगे की रोशनी से सजाया गया।
पूरे आयोजन ने स्वतंत्रता, बौद्धिक स्वतंत्रता, सामाजिक जिम्मेदारी, राष्ट्रीय विकास और सद्भाव के प्रति एएमयू की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।