आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
नीट प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध में राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक सोमवार को एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई।
हंगामे के कारण सदन में आज भी शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं हो पाया।
एक बार के स्थगन के बाद दोपहर बारह बजे बैठक के पुन: शुरू होने पर कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि देश में जो कुछ हो रहा है, उसे बताने की जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे बच्चों को पीटा गया है। उन्होंने जानना चाहा कि इस घटना की जिम्मेदारी कौन लेगा।
द्रमुक नेता तिरुचि शिवा ने कहा कि उन्होंने भी नीट के मुद्दे पर नियम 267 के तहत नोटिस दिया है। उन्होंने कहा कि नियम 267 के तहत दिए जा रहे नोटिस लंबे समय से स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं।
नियम 267 के तहत सदन में सूचीबद्ध सभी काम रोककर किसी विषय पर चर्चा करायी जाती है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जॉन ब्रिटॉस ने कहा कि संसद देश के लोगों का प्रतिनिधित्व करती है और भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। उन्होंने कहा ‘‘वहीं दूसरी ओर देश के बच्चों का खून बहा है।’’
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पी संदोष कुमार ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस के बल प्रयोग का मुद्दा उठाना चाहा। सत्ता पक्ष के सदस्य इस पर विरोध जता रहे थे वहीं विपक्ष सदस्य सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए हंगामा कर रहे थे।
सभापति ने सदस्यों से शांत रहने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की। अपनी बात का असर न होते देख उन्होंने बैठक को अपराह्न दो बजे तक स्थगित कर दिया।