Maulana Madani expresses deep concern over action against Jauhar University.
नई दिल्ली
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ध्वस्त करने के आदेश पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानून के शासन, प्राकृतिक न्याय और राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारियों से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है।
मौलाना मदनी ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय की इमारतों को ध्वस्त किया जाता है तो इसका सीधा असर हजारों छात्रों की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों के मौलिक अधिकार प्रभावित होंगे और देश एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान से भी वंचित हो सकता है, जो राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण धरोहर है।
विध्वंस ही एकमात्र कानूनी विकल्प नहीं
मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि यदि किसी निर्माण में भवन निर्माण या विकास संबंधी नियमों का उल्लंघन पाया भी जाता है, तब भी कानून के तहत विध्वंस (डिमोलिशन) ही एकमात्र या अनिवार्य उपाय नहीं है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रावधान संबंधित प्राधिकरण को परिस्थितियों के अनुसार वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की अनुमति देता है।
उनके अनुसार, यदि कोई निर्माण स्वीकृत भूमि उपयोग या मास्टर प्लान का मूल रूप से उल्लंघन नहीं करता है, तो प्राधिकरण संशोधित भवन मानचित्र को मंजूरी देने, निर्माण को नियमित (रेगुलराइज) करने, नियम उल्लंघन का कंपाउंडिंग करने, विकास शुल्क लेने या अन्य वैधानिक दंड जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है।
देशभर में अपनाए गए हैं वैकल्पिक उपाय
मौलाना मदनी ने कहा कि देश के विभिन्न विकास प्राधिकरण वर्षों से ऐसे मामलों का समाधान कानूनी विकल्पों के माध्यम से करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से किसी शैक्षणिक संस्थान के मामले में न्याय, कानून के शासन और व्यापक जनहित की मांग है कि ध्वस्तीकरण जैसे कठोर कदम से पहले सभी वैधानिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों के साथ जुड़ा हर निर्णय हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के भविष्य को प्रभावित करता है, इसलिए इस तरह के मामलों में संतुलित और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
न्यायालयों के फैसलों का भी किया उल्लेख
मौलाना मदनी ने अपने बयान में कई न्यायिक निर्णयों का हवाला भी दिया। उन्होंने कहा कि कानपुर के रोमा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज, वाराणसी विकास प्राधिकरण, झांसी विकास प्राधिकरण और इलाहाबाद विकास प्राधिकरण से जुड़े मामलों में अदालतों ने तत्काल ध्वस्तीकरण के बजाय नियमितीकरण, कंपाउंडिंग और अन्य वैधानिक सुधारात्मक उपायों को प्राथमिकता दी थी।
उन्होंने कहा कि ये उदाहरण बताते हैं कि कानून केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि परिस्थितियों के अनुरूप समाधान खोजने की भी अनुमति देता है।
सरकार से पुनर्विचार की अपील
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की कि वह जौहर विश्वविद्यालय की इमारतों को ध्वस्त करने के आदेश पर पुनर्विचार करे। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे वैधानिक और व्यावहारिक विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिनसे कानून का पालन भी सुनिश्चित हो और विश्वविद्यालय जैसी महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्था भी सुरक्षित रह सके।
मौलाना मदनी ने कहा कि हजारों छात्रों के भविष्य और देश की शैक्षणिक संपदा की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए ऐसा समाधान निकालेगी, जिससे कानून का सम्मान भी बना रहे और विद्यार्थियों की शिक्षा भी प्रभावित न हो।