मलिक असगर हाशमी/ नई दिल्ली
डिजिटल युग ने हमारी जिंदगी के कई छोटे लेकिन अहम हिस्सों को चुपचाप बदल दिया है। इन बदलावों में एक बड़ा बदलाव त्योहारों की खुशियों को जताने के तरीके में आया है। कभी रमजान और ईद के मौके पर मुबारकबाद कार्ड भेजना एक खास परंपरा हुआ करती थी। आज वही परंपरा लगभग खत्म हो चुकी है।

कुछ साल पहले तक त्योहार आते ही बाजारों में रंगीन और आकर्षक ग्रीटिंग कार्ड्स की भरमार लग जाती थी। लोग अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों को खासतौर पर चुने हुए कार्ड भेजते थे। इन कार्ड्स में भावनाएं होती थीं। शब्दों में अपनापन होता था। कई बार लोग अपने हाथ से भी कुछ लिखते थे, जिससे कार्ड और खास बन जाता था।

लेकिन यह सब आसान नहीं था। अच्छे कार्ड महंगे आते थे। फिर उन्हें पोस्ट या कूरियर से भेजने का खर्च अलग। अगर कार्ड दूर भेजना हो तो खर्च और बढ़ जाता था। त्योहार की खुशी के साथ यह एक आर्थिक बोझ भी बन जाता था। फिर भी लोग इसे निभाते थे, क्योंकि इसमें दिल जुड़ा होता था।

आज वही तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। डिजिटल युग ने इस परंपरा को लगभग समाप्त कर दिया है। अब लोग मोबाइल और कंप्यूटर के जरिए सेकंडों में मुबारकबाद भेज देते हैं। व्हाट्सएप, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म ने इस प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है।

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर ग्रीटिंग कार्ड इंडस्ट्री पर पड़ा है। एक समय था जब आर्चीज जैसी कार्ड कंपनियां त्योहारों पर विशेष कलेक्शन लॉन्च करती थीं। उनकी दुकानों पर भीड़ लगी रहती थी। आज स्थिति बिल्कुल उलट है। अब इन दुकानों में आपको त्योहारों के कार्ड बहुत कम मिलेंगे। अगर मिलेंगे भी तो सीमित संख्या में।

दिल्ली से सटे गुरुग्राम के सदर बाजार में गिफ्ट गैलरी चलाने वाले दिलीप गेरा बताते हैं कि अब उन्होंने त्योहारों के कार्ड रखना ही बंद कर दिया है। उनके मुताबिक ग्राहक अब इनकी मांग नहीं करते। लोग सीधे मोबाइल से मैसेज भेजना ज्यादा पसंद करते हैं।

डिजिटल बदलाव के साथ एआई तकनीक ने इस ट्रेंड को और तेज कर दिया है। अब कोई भी व्यक्ति कुछ ही सेकंड में अपनी पसंद का कार्ड तैयार कर सकता है। इसके लिए खास डिजाइन स्किल की भी जरूरत नहीं है। आप बस एक छोटा सा निर्देश दीजिए और सुंदर कार्ड आपके सामने तैयार हो जाता है।

कई लोग डिजाइन टूल्स का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। कैन्वा जैसे प्लेटफॉर्म ने आम लोगों को डिजाइनर बना दिया है। यहां पहले से तैयार टेम्पलेट मिलते हैं। आप अपनी फोटो और मैसेज जोड़कर नया कार्ड बना सकते हैं। जो लोग फोटोशॉप जानते हैं, वे इसमें और सुधार कर लेते हैं।
Eid Mubarak from our family at Oman Air to yours🤍 pic.twitter.com/JbhSVeNiwd
— Oman Air (@omanair) March 19, 2026
अगर कोई खुद कार्ड नहीं बनाना चाहता, तब भी उसके पास विकल्पों की कमी नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हजारों रेडीमेड कार्ड उपलब्ध हैं। खासतौर पर त्योहारों के दौरान ये प्लेटफॉर्म मुबारकबाद संदेशों से भर जाते हैं। लोग इनमें से पसंद का कार्ड चुनते हैं और तुरंत शेयर कर देते हैं।
✨Wishing you a joyous Eid al-Fitr filled with love, peace, and prosperity✨.
— ғᴏʀᴇᴠᴇʀ ᴘᴀʟᴇsᴛɪɴᴇ (@Pal_4ever__) March 19, 2026
🕌🌙May this special day bring you and your loved ones closer together.☪️ Eid Mubarak!#EidMubarak#ForeverPalestine#ForeverPalestine pic.twitter.com/vIFaklNGtS
एक्स पर यह प्रक्रिया और भी आसान है। वहां ट्रेंडिंग सेक्शन में जाकर आप सीधे ईद या रमजान से जुड़े कार्ड देख सकते हैं। इस समय ईद मुबारक जैसे शब्द ट्रेंड कर रहे होते हैं। इन ट्रेंड्स पर क्लिक करते ही सैकड़ों खूबसूरत कार्ड आपके सामने आ जाते हैं।

इस डिजिटल सुविधा ने एक और दिलचस्प बदलाव किया है। अब एक ही कार्ड कई बार अलग अलग लोगों के बीच घूमता रहता है। कोई एक व्यक्ति कार्ड पोस्ट करता है और वही कार्ड आगे कई ग्रुप्स में शेयर होता रहता है। इस तरह एक कार्ड सैकड़ों लोगों तक पहुंच जाता है।

हालांकि इस बदलाव के कुछ भावनात्मक पहलू भी हैं। पहले कार्ड चुनने और भेजने में जो मेहनत लगती थी, उसमें एक अलग ही खुशी होती थी। अब सब कुछ तुरंत हो जाता है। समय की बचत जरूर होती है, लेकिन वह व्यक्तिगत स्पर्श कहीं न कहीं कम हो गया है।

फिर भी यह बदलाव समय की मांग है। डिजिटल युग ने न केवल खर्च कम किया है, बल्कि प्रक्रिया को भी सरल बना दिया है। अब हर व्यक्ति बिना किसी अतिरिक्त खर्च के अपने प्रियजनों तक अपनी भावनाएं पहुंचा सकता है।

ईद और रमजान जैसे त्योहार अब भी उतनी ही खुशी से मनाए जाते हैं। बस तरीका बदल गया है। कागज के कार्ड की जगह अब डिजिटल स्क्रीन ने ले ली है। संदेश वही हैं। भावनाएं भी वही हैं। फर्क सिर्फ माध्यम का है।

आने वाले समय में यह बदलाव और गहरा होगा। एआई और नई तकनीकें इसे और आसान बनाएंगी। लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि त्योहारों की असली खूबसूरती उनके पीछे छिपी भावनाओं में होती है। चाहे वह कार्ड कागज का हो या डिजिटल स्क्रीन पर, मायने सिर्फ दिल से निकले शब्दों के हैं।