ईद पर मेहंदी: त्योहारों और संस्कृति का रंग

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 20-03-2026
Mehndi on Eid: The Colors of Festivals and Culture
Mehndi on Eid: The Colors of Festivals and Culture

 

जेबा नसीम

रमज़ान के बाद ईद की खुशियाँ तब तक अधूरी लगती हैं जब तक महिलाओं के हाथों पर मेहंदी के रंग नहीं दिखते। मेहंदी सिर्फ सजावट नहीं है, यह एक आभूषण की तरह होती है। हाथों पर बने डिज़ाइन और उनका रंग लोगों को आकर्षित करता है। चाहे किसी भी धर्म का त्योहार हो, मेहंदी की रौनक हर जगह गहरी दिखाई देती है। ईद के साथ शादियों के अवसर, करवा चौथ, दिवाली और तीज जैसे त्योहारों में भी मेहंदी का खास महत्व होता है। इसे हिना के नाम से भी जाना जाता है और यह दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में लंबे समय से प्रचलित है। खुशी, सुंदरता और आध्यात्मिक सुरक्षा का प्रतीक होने के कारण मेहंदी हर अवसर को खास बनाती है।

ईद पर मेहंदी का महत्व केवल हाथों को सजाने तक सीमित नहीं है। यह एक सामुदायिक परंपरा भी है। महिलाएं एक साथ बैठती हैं, पारंपरिक गीत गाती हैं और खुशी का माहौल बनाती हैं। इससे आपसी रिश्ते मजबूत होते हैं और सामूहिक उत्साह बढ़ता है। समय के साथ मेहंदी के डिज़ाइन बदल गए हैं और आधुनिक शैली में विकसित हुए हैं, लेकिन इसकी सांस्कृतिक भावना आज भी उतनी ही मजबूत है।

मेहंदी का इतिहास लगभग नौ हजार साल पुराना है। इसके शुरुआती प्रमाण प्राचीन मिस्र में मिलते हैं। उस समय लोग अपने बाल और नाखून रंगने के लिए मेहंदी का इस्तेमाल करते थे। कहा जाता है कि रानी क्लियोपेट्रा भी अपनी सुंदरता बढ़ाने के लिए मेहंदी का प्रयोग करती थीं।

मिस्र वासियों की परंपरा थी कि ममी को दफनाने से पहले उनके नाखूनों पर मेहंदी लगाई जाती थी। भारत में मेहंदी की उत्पत्ति को लेकर मत अलग हैं। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह भारत में आई, जबकि अन्य का कहना है कि यह मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका से भारत आई। ऐसा भी माना जाता है कि मुगलों ने इसे 12वीं शताब्दी में भारतीय उपमहाद्वीप में पेश किया। व्यापार मार्गों के जरिए यह मिस्र से भारत पहुंची और धीरे-धीरे भारतीय परंपराओं का हिस्सा बन गई।

इस्लामी संस्कृति में मेहंदी को सुन्नत माना जाता है। पैगंबर मुहम्मद (अल्लाह उन पर शांति और आशीर्वाद बरसाए) ने इसे प्रोत्साहित किया था। ईद अल-फितर, ईद अल-अधा और शादियों में इसका खास महत्व होता है। महिलाएं इसे हाथों पर लगाती हैं और सुंदरता बढ़ाती हैं, जबकि पुरुष भी बाल और दाढ़ी पर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। पैगंबर ने कहा कि सफेद बालों को रंगने के लिए मेहंदी और कथम सबसे अच्छी चीजें हैं। इस परंपरा का उल्लेख तिर्मिज़ी 1753 में मिलता है।

मेहंदी के डिज़ाइन भी उसकी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं। दक्षिण एशियाई शैली में फूल और पैस्ले पैटर्न आम हैं। यह नाजुक और बारीक डिज़ाइन होती है। दुल्हन की मेहंदी में इसकी खूबसूरती सबसे स्पष्ट दिखाई देती है।

उंगलियों तक विस्तारित डिज़ाइन पूरे हाथ को भव्य रूप देता है। अरबी मेहंदी डिज़ाइन सरल और सुरुचिपूर्ण होती है। इसमें फूल और मेहराब जैसी आकृतियाँ होती हैं और यह दक्षिण एशियाई डिज़ाइन की तुलना में कम जटिल होती है। उत्तर अफ़्रीकी शैली में त्रिकोण, गुंबदनुमा आकार और रेखीय पैटर्न होते हैं। यह संतुलित और सामंजस्यपूर्ण होती है और दक्षिण एशियाई डिज़ाइन से कुछ मिलती-जुलती है।

पहले मेहंदी लगाना समय लेने वाला काम था। इसे रात भर हाथों पर छोड़ना पड़ता था ताकि रंग गहरा आए। 1980 के दशक में जटिल डिज़ाइन आम नहीं थे। उस समय केवल सरल डिज़ाइन बनते थे और रात भर छोड़ने पर रंग गहरा होता था। 1987 से 1990 के बीच कॉन मेहंदी प्रचलित हुई और लोगों के हाथों पर एक विशेष डिज़ाइन बनना शुरू हुआ।

1995 से 2000 के बीच बड़े और प्रमुख फूलों के डिज़ाइन लोकप्रिय हुए। आज मेहंदी एक पूरी कला बन चुकी है। इसमें फूल, पंखुड़ियां और अन्य सुंदर पैटर्न शामिल हैं। महिलाएं इसे उत्साह के साथ हाथों पर सजाती हैं और इसे कला और फैशन का हिस्सा मानती हैं।

मेहंदी अब सिर्फ भारत या दक्षिण एशिया तक ही सीमित नहीं है। यह पश्चिमी देशों में भी लोकप्रिय हो गई है। 1990 के दशक में प्रवासियों के माध्यम से यह वहां पहुंची और धीरे-धीरे प्रसिद्ध हुई। मशहूर हस्तियों ने इसे अपनाया और एक नई पहचान दी। बियॉन्से, मैडोना, कैथरीन ज़ेटा-जोन्स और नाओमी कैंपबेल जैसी हस्तियों ने मेहंदी को फैशन और कला का हिस्सा बनाया। विशेष रूप से मैडोना की मेहंदी वाली तस्वीर ने इसे नए स्तर पर पहुँचाया। आज मेहंदी केवल पूर्वी परंपरा नहीं रही, बल्कि पश्चिम में भी इसे अपनाया जा रहा है और यह वैश्विक फैशन और संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है।

मेहंदी सिर्फ सजावट नहीं है। यह इतिहास, संस्कृति और सौंदर्य का प्रतीक है। यह त्योहारों में खुशियाँ लाती है, सामाजिक बंधन मजबूत करती है और आध्यात्मिक सुरक्षा का संदेश देती है। प्राचीन परंपराओं को आधुनिक उत्सवों से जोड़ती हुई यह कला आज हर जगह महत्व रखती है।

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मेहंदी के रंग और डिज़ाइन हर हाथ को खास बनाते हैं। यह खुशियों का प्रतीक है और समाज में भाईचारे और प्रेम को बढ़ाता है। पूर्व से पश्चिम तक अपनी यात्रा में मेहंदी ने यह साबित किया कि यह केवल सजावट नहीं बल्कि संस्कृति, इतिहास और आधुनिकता का संगम है।