ईरान समझौते के बाद तेल कीमतों में बड़ी गिरावट

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 15-06-2026
Sharp drop in oil prices following the Iran deal.
Sharp drop in oil prices following the Iran deal.

 

दुबई।

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद वैश्विक निवेशकों की चिंताएं कम हुईं, जिसके परिणामस्वरूप ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पिछले तीन महीनों में तेल बाजार की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा ईंधन बाजार को राहत मिल सकती है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते की घोषणा के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में लगभग 3.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद इसकी कीमत घटकर करीब 84 डॉलर प्रति बैरल रह गई। यह स्तर पिछले कई महीनों के मुकाबले काफी नीचे माना जा रहा है।

इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज गिरावट देखने को मिली। रिपोर्ट के अनुसार, डब्ल्यूटीआई की कीमत में लगभग 4.8 प्रतिशत की कमी आई और यह करीब 81 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। दोनों प्रमुख बेंचमार्क में आई इस गिरावट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

रविवार देर शाम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बन गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड की राजधानी जिनेवा में आधिकारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस घोषणा के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया और उनमें लगातार गिरावट देखने को मिली।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि 4 मार्च के बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आई हैं। हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंकाओं के कारण तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी गई थी। ऐसे में संभावित समझौते की खबर ने निवेशकों को राहत दी और बाजार में बिकवाली बढ़ गई।

ऊर्जा बाजार का विश्लेषण करने वाली संस्था रैपिडन एनर्जी ग्रुप के अध्यक्ष बॉब मैकनैली ने अमेरिकी मीडिया से बातचीत में कहा कि जब 28 फरवरी के आसपास क्षेत्रीय संघर्ष शुरू हुआ था, तब कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी। युद्ध के कारण कीमतें तेजी से बढ़ीं और एक समय 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई थीं।

मैकनैली का मानना है कि तेल की कीमतों का 90 डॉलर से नीचे आना निश्चित रूप से बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल और अन्य माल की आवाजाही पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तब भी वैश्विक तेल बाजार को युद्ध-पूर्व स्थिति में लौटने में कुछ समय लगेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि क्षेत्रीय तनाव वास्तव में कम होता है और आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रहती है, तो आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में और स्थिरता देखने को मिल सकती है। इसका असर दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिससे उपभोक्ताओं और आयातक देशों को राहत मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।