अमेरिका-ईरान युद्ध थमने से घऱेलू बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 1,695 अंक उछला

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 12-06-2026
The domestic market surged sharply as the US-Iran war stagnated
The domestic market surged sharply as the US-Iran war stagnated

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने के संकेतों के बीच वैश्विक बाजारों में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने से शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजारों में जोरदार उछाल आया। सेंसेक्स 1,695 अंक से अधिक चढ़ गया जबकि निफ्टी में करीब 461 अंक की तेजी दर्ज की गई।
 
बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 1,695.40 अंक यानी 2.30 प्रतिशत उछलकर 75,527.95 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,775.47 अंक यानी 2.40 प्रतिशत चढ़कर 75,608.02 अंक तक पहुंच गया।
 
इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 461.30 अंक यानी 1.99 प्रतिशत बढ़कर 23,622.90 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 483.75 अंक प्रतिशत चढ़कर 23,645.35 तक पहुंच गया था।
 
विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सकारात्मक बयान से शेयर बाजार में तेजी का रुझान रहा। ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने और दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर सहमति बनने की बात कही है। इससे वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी और निवेशकों की धारणा मजबूत हुई।
 
सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), टाइटन, इटर्नल और एचडीएफसी बैंक के शेयर प्रमुख रूप से लाभ में रहे।
 
दूसरी तरफ, सेंसेक्स में शामिल टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड ही नुकसान में रहने वाली कंपनियों में शामिल रहीं।
 
सकारात्मक वैश्विक संकेतों से वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 3.98 प्रतिशत गिरकर 86.78 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
 
एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 4.63 प्रतिशत और जापान का निक्की सूचकांक 2.81 प्रतिशत चढ़ा। चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक भी बढ़त में रहे।
 
यूरोपीय बाजार भी बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार बृहस्पतिवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे।
 
लाइवलॉन्ग वेल्थ के शोध विश्लेषक हरिप्रसाद के. ने कहा, "अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने की खबर आने से हाल के दिनों की सबसे बड़ी तेजी देखी गई। वैश्विक जोखिम धारणा में सुधार, भू-राजनीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से घरेलू शेयर बाजार को समर्थन मिला।"