आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
रुपये ने बुधवार को सीमित दायरे में कारोबार किया और अंत में दो पैसे की मामूली गिरावट के साथ 94.97 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर आ गया। विदेशी पूंजी के प्रवाह से मिले समर्थन पर कमजोर घरेलू शेयर बाजार और मजबूत अमेरिकी डॉलर का असर भारी पड़ा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रुपये की गिरावट पर नजर रख रहा है, क्योंकि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल हो गई है और अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ने से बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के बीच डॉलर सूचकांक 99.80 के आसपास बना हुआ है।
इसके अलावा, बाजार भागीदारों ने सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना जताई है। इससे अमेरिकी बॉन्ड पर प्रतिफल बढ़ा है और डॉलर में व्यापक तेजी आई है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.97 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 94.83 के ऊंचे और 94.99 के निचले स्तर तक गया। कारोबार के अंत में रुपया यह 94.97 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा जो पिछले बंद भाव से दो पैसे की गिरावट है।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला किए जाने से भू-राजनीतिक तनाव फिर बढ़ गया है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आई है। ऐसे में हमारा अनुमान है कि रुपया थोड़ी नकारात्मक धारणा के साथ कारोबार करेगा... ’’
उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 94.70 से 95.25 के दायरे में रहने के आसार हैं।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.14 प्रतिशत बढ़कर 99.82 पर पहुंच गया।