आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
नई दिल्ली, 22 अप्रैल। भारत का रियल एस्टेट सेक्टर साल 2026 की पहली तिमाही में नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। जनवरी से मार्च के बीच इस क्षेत्र में 5.1 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह पिछले साल की तुलना में 72 फीसदी अधिक है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह उछाल अचानक नहीं आया। इसके पीछे घरेलू निवेशकों और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी REITs की मजबूत भागीदारी रही। पिछली तिमाही के मुकाबले भी निवेश में 53 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे साफ है कि बाजार में भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।
इस पूरे निवेश का बड़ा हिस्सा तैयार ऑफिस स्पेस और जमीन खरीद में गया। कुल निवेश का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इन्हीं दो क्षेत्रों में केंद्रित रहा। खास बात यह रही कि घरेलू निवेशकों का दबदबा साफ दिखा। कुल निवेश में उनकी हिस्सेदारी 96 फीसदी रही।
डेवलपर्स ने इसमें अहम भूमिका निभाई। कुल पूंजी का 42 फीसदी उनके जरिए आया। वहीं REITs ने भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई और लगभग 40 फीसदी निवेश किया। REITs के जरिए 2 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश हुआ, जो इस सेगमेंट में तेजी का संकेत देता है।
जमीन खरीद के मामले में भी दिलचस्प रुझान सामने आए। कुल निवेश का 73 फीसदी हिस्सा मिक्स्ड यूज और रिहायशी प्रोजेक्ट्स पर खर्च किया गया। बाकी निवेश ऑफिस, वेयरहाउस और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में गया। इससे साफ है कि आवासीय बाजार की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।
शहरों की बात करें तो बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली एनसीआर सबसे आगे रहे। कुल निवेश का करीब 65 फीसदी हिस्सा इन्हीं तीन शहरों में आया। विदेशी निवेश की बात करें तो सिंगापुर और कनाडा प्रमुख स्रोत रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत का रियल एस्टेट सेक्टर स्थिर बना हुआ है। घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और निवेशकों का भरोसा इसे आगे बढ़ा रहा है।
आने वाले समय में भी इस क्षेत्र में संतुलित निवेश की उम्मीद है। एक तरफ जहां नियमित आय देने वाली संपत्तियों पर ध्यान रहेगा, वहीं दूसरी तरफ तेजी से बढ़ने वाले प्रोजेक्ट्स में भी निवेश जारी रहेगा।
यह आंकड़े सिर्फ निवेश का संकेत नहीं हैं, बल्कि यह दिखाते हैं कि भारत का रियल एस्टेट बाजार अब पहले से ज्यादा संगठित और परिपक्व हो चुका है।