ब्राजील के São Paulo State University के वैज्ञानिकों ने पाया कि Moringa oleifera के बीजों का अर्क पानी में मौजूद प्लास्टिक कणों को एक साथ जमा कर देता है। इससे उन्हें फिल्टर करना आसान हो जाता है। अध्ययन के नतीजे ACS Omega में प्रकाशित हुए हैं।
शोध के अनुसार, यह पौधों से बना घोल एल्यूमिनियम सल्फेट जैसे केमिकल ट्रीटमेंट के बराबर काम करता है। कुछ स्थितियों में तो इसका असर उससे बेहतर भी पाया गया। खास बात यह है कि मोरिंगा का यह घोल कम लागत में तैयार किया जा सकता है, जिससे छोटे गांवों और ग्रामीण इलाकों में इसका उपयोग आसान हो सकता है।
वैज्ञानिकों ने अपने परीक्षण में पानी में पीवीसी माइक्रोप्लास्टिक मिलाया, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। इसके बाद कोएगुलेशन और फिल्ट्रेशन प्रक्रिया अपनाई गई। इसमें पाया गया कि मोरिंगा के बीज प्लास्टिक कणों के चार्ज को कम कर देते हैं, जिससे वे आपस में चिपककर बड़े गुच्छों में बदल जाते हैं और आसानी से हटाए जा सकते हैं।