रेलवे में बड़ा बदलाव आने वाला, ट्रैक कर्मियों की सुरक्षा और काम करने का तरीका बदलेगा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 22-04-2026
Railways are set to undergo a major transformation
Railways are set to undergo a major transformation

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
भारतीय रेलवे में आने वाले पांच से आठ वर्षों में ट्रैक सुरक्षा और रखरखाव के तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा कि अब सदी पुराने तरीकों की जगह आधुनिक तकनीक लेगी, जिससे कर्मचारियों का काम ज्यादा सुरक्षित और आसान होगा।
 
दिल्ली में आयोजित ऑल इंडिया ट्रैक मेंटेनर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य रेलवे संचालन और कर्मचारियों की सुरक्षा को विकसित देशों के स्तर तक पहुंचाना है। उन्होंने यह भी कहा कि बीते दस वर्षों में रेलवे हादसों में करीब 90 फीसदी की कमी आई है, लेकिन सुरक्षा के मामले में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।
 
मंत्री ने खास तौर पर ट्रैक पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पुराने वीएचएफ आधारित ‘रक्षक’ सिस्टम में कई सीमाएं थीं। पहाड़ी और दूरदराज इलाकों में सिग्नल नहीं पहुंच पाता था। अब इसकी जगह मोबाइल आधारित नया ऐप लाया जा रहा है, जो फिलहाल दक्षिण और पश्चिम रेलवे में परीक्षण के दौर में है।
 
उन्होंने कहा कि देश के लगभग 95 फीसदी हिस्से में 4जी और 5जी नेटवर्क उपलब्ध है। जहां नेटवर्क की कमी होगी, वहां नए टावर लगाए जाएंगे। इस ऐप के सफल होने के बाद इसे सभी ट्रैक कर्मचारियों को दिया जाएगा, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
 
रेलवे के आधुनिकीकरण पर बात करते हुए मंत्री ने बताया कि ट्रैक मेंटेनेंस का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। पिछले दशक में करीब 36 हजार किलोमीटर नए ट्रैक बिछाए गए हैं। ऐसे में अब रखरखाव के लिए मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। फिलहाल 1800 ट्रैक मशीनें हैं, जिन्हें बढ़ाकर 3000 करने का लक्ष्य रखा गया है।
 
नई तकनीक के तहत रेल कम रोड वाहन भी लाए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारी ट्रैक पर आसानी से सफर कर सकेंगे और लंबी दूरी पैदल चलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा ड्रोन से निरीक्षण और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल भी बढ़ाया जाएगा।
 
मंत्री ने बताया कि अब मजबूत रेल पटरियां, बेहतर वेल्डिंग तकनीक और स्क्रू आधारित फास्टनर जैसे बदलाव लागू किए जा रहे हैं। इससे ट्रैक की मजबूती बढ़ेगी और बार बार जांच की जरूरत भी कम होगी।