आवाज द वॉयस/ नई दिल्ली
कहते हैं कि एक मर्द को शिक्षित करने से सिर्फ एक व्यक्ति संवरता है। लेकिन एक औरत को शिक्षित करने से पूरा खानदान और समाज संवर जाता है। भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों और यूनिवर्सिटीज में आज ऐसी ही एक नई इबारत लिखी जा रही है। यह कहानी उन मुस्लिम महिलाओं की है जिन्होंने अपनी बौद्धिक क्षमता, अटूट जज्बे और सामाजिक प्रतिबद्धता से न सिर्फ अकादमिक जगत को नई दिशा दी है, बल्कि पुरानी बेड़ियों को भी तोड़ दिया है।
इन महिलाओं का सफर साहित्य, इतिहास, विज्ञान, कूटनीति और समाज सुधार जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से होकर गुजरता है। इन सब में एक बात साझा है। वह यह कि ज्ञान का असली मकसद समाज की सेवा करना है। 'आवाज द वॉयस' की खास पेशकश 'परवाज' की इस कड़ी में आइए जानते हैं उन दस चुनिंदा मुस्लिम महिलाओं के बारे में, जो आज के दौर की असली रोल मॉडल हैं।

1. अरजुमंद आरा: शब्दों से रची नई दुनिया
दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर अरजुमंद आरा साहित्य और नारीवादी सोच का एक बड़ा नाम हैं। उन्होंने अपनी कलम के जरिए उर्दू और हिंदी के बीच एक ऐसा पुल बनाया है जिसकी आज सख्त जरूरत है। अरजुमंद आरा ने 20से ज्यादा बड़ी साहित्यिक कृतियों का अनुवाद किया है। साल 2021में उन्हें साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार से नवाजा गया। वह सिर्फ पढ़ाती नहीं हैं, बल्कि अपनी लेखनी से उन महिलाओं की आवाज को बुलंद करती हैं जिन्हें समाज अक्सर अनसुना कर देता है। उनका काम हमारी साहित्यिक विरासत को सहेजने का बेहतरीन जरिया है।

2. सैयद तनवीर नसरीन: कूटनीति और सामाजिक सक्रियता का संगम
बर्दवान विश्वविद्यालय की सैयद तनवीर नसरीन की शख्सियत बहुआयामी है। उन्होंने अकादमिक जगत और कूटनीति के बीच एक संतुलन कायम किया है। मालदीव में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत के सांस्कृतिक रिश्तों को नई मजबूती दी। इसके साथ ही वह महिलाओं के अधिकारों और अंतरधार्मिक सद्भाव पर मुखर होकर बात करती हैं। उनकी पहचान एक ऐसी विद्वान के रूप में है जो समाज के अल्पसंख्यकों की पहचान और उनके अधिकारों के लिए जमीन पर काम करती हैं।

3. आबेदा इनामदार: सरकारी कुर्सी छोड़ शिक्षा की मशाल थामी
आबेदा इनामदार की कहानी त्याग और समर्पण की मिसाल है। उन्होंने एक शानदार सरकारी करियर को सिर्फ इसलिए छोड़ दिया ताकि वह शिक्षा के क्षेत्र में काम कर सकें। महाराष्ट्र कॉस्मोपॉलिटन एजुकेशन सोसाइटी और प्रसिद्ध आज़म कैंपस के जरिए उन्होंने हजारों लड़कियों और पिछड़े तबके के छात्रों के लिए सफलता के दरवाजे खोले। आज उनके बनाए संस्थान पीढ़ियों को सशक्त बना रहे हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि असली सुरक्षा पद में नहीं बल्कि समाज के उत्थान में है।

4. बेनजीर तांबोली: संघर्ष से निकली न्याय की आवाज
बेनजीर तांबोली ने अपनी व्यक्तिगत मुश्किलों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपने दुखों को समाज की भलाई के लिए एक मिशन में बदल दिया। 'मुस्लिम सत्यशोधक मंडल' के साथ जुड़कर उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों और प्रगतिशील सामाजिक सुधारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। वह आज उन महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण हैं जो न्याय और समानता की तलाश में हैं।

5. नइमा खातून: एएमयू के इतिहास का नया अध्याय
साल 2024अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के लिए ऐतिहासिक रहा। नइमा खातून इस प्रतिष्ठित संस्थान की पहली महिला वाइस चांसलर बनीं। एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक और लेखिका के रूप में उन्होंने हमेशा शोध और आधुनिकता पर जोर दिया है। वह आज एएमयू जैसे संस्थान में महिलाओं के सशक्तिकरण और संस्थागत सुधारों का नेतृत्व कर रही हैं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि काबिलियत के आगे जेंडर की दीवारें ढह जाती हैं।

6. नजमा अख्तर: जामिया को दिलाई वैश्विक पहचान
नजमा अख्तर ने जामिया मिलिया इस्लामिया की पहली महिला कुलपति बनकर एक बड़ा रिकॉर्ड बनाया। पद्मश्री से सम्मानित नजमा अख्तर ने जामिया के ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव किए। उन्होंने प्रोफेशनल एजुकेशन को बढ़ावा दिया और रिसर्च के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए। उनके नेतृत्व में जामिया आज दुनिया के सम्मानित अकादमिक संस्थानों की सूची में मजबूती से खड़ा है।

7. नीलोफर खान: कश्मीर में शिक्षा का नया चेहरा
नीलोफर खान कश्मीर विश्वविद्यालय का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनीं। यह कश्मीर की उच्च शिक्षा के लिए एक बड़ा मोड़ था। लगभग चार दशकों के अपने करियर में उन्होंने 100से ज्यादा रिसर्च पेपर लिखे हैं। वह आज कश्मीर की उन हजारों युवतियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं जो अकादमिक क्षेत्र में नेतृत्व के सपने देखती हैं। उनका सफर संघर्ष और अटूट विश्वास की कहानी है।

8. शाहिदा मुर्तजा: हाशिए के समाज का आईना
शाहिदा मुर्तजा ने तीन दशकों से ज्यादा समय दक्षिण भारत की उन महिलाओं के बीच बिताया है जिन्हें समाज अक्सर भूल जाता है। मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी की पूर्व डीन के तौर पर उन्होंने जमीनी स्तर पर शोध किया। उन्होंने अपने काम को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा। वह जेंडर जस्टिस और जागरूकता के लिए इसे एक मिशन के तौर पर चला रही हैं।

9. सोफिया बानू: विज्ञान और नवाचार की शक्ति
सोफिया बानू भारत के उत्तर-पूर्व क्षेत्र में वैज्ञानिक क्रांति का चेहरा हैं। गुवाहाटी विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर सोफिया बायोटेक्नोलॉजी और कृषि स्थिरता के क्षेत्र में अद्भुत काम कर रही हैं। उनका रिसर्च सीधे तौर पर किसानों और पर्यावरण की मदद कर रहा है। वह विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने वाली युवा लड़कियों के लिए एक बड़ी मिसाल हैं।

10. सैयद मुबीन जेहरा: राष्ट्र निर्माण की मुखर विद्वान
आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज (ARSD) में कार्यरत सैयद मुबीन जेहरा एक प्रखर लेखिका और विचारक हैं। वह शिक्षा, लैंगिक समानता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर संवाद करती हैं। उनकी विद्वत्ता केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं है। वह अपने लेखों और भाषणों के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश में जुटी रहती हैं।
इन दस महिलाओं की कहानियां हमें बताती हैं कि बदलाव रातों-रात नहीं आता। इसके लिए सालों की मेहनत और धैर्य की जरूरत होती है। ये महिलाएं आज की मुस्लिम लड़कियों को बता रही हैं कि उनके सपने किसी बंधन के मोहताज नहीं हैं। चाहे वह विज्ञान की प्रयोगशाला हो या किसी विश्वविद्यालय की कुलपति की कुर्सी, महिलाएं हर जगह अपना लोहा मनवा रही हैं।
इनकी सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है। यह जीत है उस सोच की जो लड़कियों को पढ़ाने और आगे बढ़ाने में यकीन रखती है। आज का मुस्लिम समाज इन शिक्षित और सशक्त महिलाओं की बदौलत एक नई करवट ले रहा है। हमें ऐसी आवाजों को सुनने और उनके संघर्षों का सम्मान करने की जरूरत है ताकि आने वाली पीढ़ियां इनसे सीख लेकर अपना रास्ता खुद बना सकें।