कला के आसमान में चमकीं भारत की 10 मुस्लिम महिलाएं

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 28-06-2026
10 Muslim Women from India Who Shone in the World of Art
10 Muslim Women from India Who Shone in the World of Art

 

आवाज द वॉयस ब्यूरो/नई दिल्ली

आवाज द वॉयसने देश की प्रतिभाशाली मुस्लिम महिलाओं के संघर्ष और सफलता को सामने लाने के लिए एक खास मुहिम शुरू की है। इस विशेष श्रृंखला का नाम ‘परवाज’है। परवाज श्रृंखला के इस नए भाग में हम बात कर रहे हैं आर्ट और कल्चर यानी कला और संस्कृति जगत की। भारत की कई मुस्लिम महिलाओं ने कला के क्षेत्र में अपनी मेहनत से एक नया मुकाम हासिल किया है।

इन महिलाओं ने अपनी कला से न सिर्फ समाज की सोच को बदला है बल्कि पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। आज हम ऐसी ही 10मुस्लिम महिला कलाकारों की प्रेरणादायक कहानियां आपके    साथ साझा कर रहे हैं। इन महिलाओं का सफर हर किसी के भीतर एक नया हौसला भर देता है।

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1. डॉ. फरखंदा खान फिदा (सूफी चित्रकार)

जीवन का रास्ता कब बदल जाए कोई नहीं जानता।साल 1997 में दिल्ली की एक कला प्रदर्शनी में युवा फरखंदा खान फिदा की मुलाकात मशहूर पेंटर एमएफ हुसैन से हुई।हुसैन साहब ने उन्हें एक सीधी सलाह दी कि हमेशा वही पेंट करो जो दिल से निकलता है।

यह बात फरखंदा के जीवन का मूलमंत्र बन गई। फरखंदा के पिता भारतीय वायुसेना में थे और उन्हें बचपन से ही घर में कला का माहौल मिला। उन्होंने ललित कला में स्वर्ण पदक जीता और बाद में इसी विषय में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की।

दिल्ली के हजरत निजामuddin दरगाह जाने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने सूफीवाद को गहराई से महसूस किया। इसके बाद उनकी पेंटिंग्स में सूफी रंग साफ दिखने लगे। आज उनकी बनाई पेंटिंग्स देश और विदेश में शांति और रूहानियत का संदेश फैला रही हैं।

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2. फौजिया दास्तानगो (किस्सागोई की उस्ताद)

पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में कभी कहानियों की महफिलें सजती थीं। फौजिया दास्तानगो ने इस दम तोड़ती ओरल ट्रेडिशन यानी मौखिक कहानी सुनाने की कला को फिर से जिंदा किया है। फौजिया का जन्म पुरानी दिल्ली के पहाड़ी भोजला इलाके में हुआ था जो दास्तानगोई संस्कृति का पुराना केंद्र रहा है। बचपन से ही उन्हें उर्दू साहित्य और कहानियों से गहरा लगाव था।

साल 2006 में उन्होंने पहली बार दास्तानगोई का एक लाइव शो देखा और वहीं से उनकी जिंदगी बदल गई। उन्होंने अपनी अच्छी खासी प्रोफेसर की नौकरी छोड़ दी। फौजिया ने एक ऐसे क्षेत्र में कदम रखा जहां सिर्फ पुरुषों का दबदबा माना जाता था। आज वह पूरे भारत और विदेशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं। वह पुरानी कहानियों में आधुनिक मुद्दों को शामिल करके लोगों को जोड़ती हैं।

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3. जमीला निशात (कवि और सामाजिक कार्यकर्ता)

हैदराबाद की रहने वाली जमीला निशात एक मशहूर कवयित्री और निडर सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनके शब्दों में समाज को बदलने की ताकत है। जमीला ने शाहीन विमेंस रिसोर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन की स्थापना की है। इस संस्था के जरिए वह पिछले कई सालों से गरीब और बेसहारा महिलाओं को शिक्षा, कानूनी मदद और रोजगार की ट्रेनिंग दे रही हैं।

जमीला दक्खनी उर्दू में अपनी कविताएं लिखती हैं। उनकी कविताओं में महिलाओं के दर्द, उनकी पहचान और उनके अधिकारों की बात होती है। जमीला निशात का जीवन कला और सामाजिक सुधार का एक सुंदर उदाहरण है। वह जमीनी स्तर पर काम करके महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं।

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4. नवाब जहां बेगम (शाही कला की संवाहक)

भोपाल के शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाली नवाब जहां बेगम ने आधुनिक भारतीय कला को एक नई ऊंचाई दी है। वह अपनी पेंटिंग्स में असली 24 कैरेट सोने का इस्तेमाल करती हैं। बचपन से ही कला के प्रति उनका गहरा लगाव था जिसे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पहचान में बदल दिया। नवाब जहां बेगम पैलेट नाइफ तकनीक का इस्तेमाल करती हैं।

उन्होंने पारंपरिक गोंड कला को सोने की कारीगरी के साथ मिलाकर एक नया रूप दिया है। उनकी इस कला को दुनिया भर में काफी सराहना मिली है और उन्हें कई पुरस्कार भी मिले हैं। उनकी कलाकृतियों में भारत की सांस्कृतिक विरासत की झलक साफ दिखाई देती है। वह वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व बेहद खूबसूरती से कर रही हैं।

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5. बारां इजलाल (अहसासों के कलाकार)

बारां इजलाल एक ऐसे कलाकार हैं जिनकी कला में जज्बात और एक अनूठी बगावत दिखती है। उनका बचपन एक ऐसे माहौल में बीता जहां कला और कल्पना के लिए ज्यादा जगह नहीं थी। उनके लिए कला सिर्फ एक पेशा नहीं बल्कि जीने का जरिया बनी। बचपन में दीवारों पर स्केच बनाने वाले बारां आज बड़े कलात्मक इंस्टॉलेशन तैयार करते हैं जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

वह अपनी कलाकृतियों में राख, जंग और टूटी हुई चीजों जैसी अजीब सामग्रियों का इस्तेमाल करते हैं। उनकी प्रसिद्ध कला श्रृंखला 'इकोज ऑफ साइलेंस' लोगों के दिलों को छू लेती है। बारां अपनी कला के माध्यम से समाज के छिपे हुए सच और यादों को सामने लाते हैं।

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6. रफा यासमीन (संगीत की उभरती आवाज)

पश्चिम बंगाल के मालदा की रहने वाली रफा यासमीन ने बहुत कम उम्र में अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। रफा ने बचपन से ही शास्त्रीय और आधुनिक संगीत की शिक्षा ली है। टेलीविजन के मशहूर रियलिटी शो सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स से उन्हें देश भर में पहचान मिली। वह बंगाल की सबसे होनहार युवा गायिकाओं में से एक हैं।

संगीत के साथ-साथ रफा सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं। वह साइबर सुरक्षा एंबेसडर के रूप में काम कर रही हैं। वह इंटरनेट की दुनिया में युवाओं को सुरक्षित रहने के प्रति जागरूक करती हैं। रफा की कहानी दिखाती है कि कला के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को कैसे निभाया जाता है।

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7. रानी खानम (कथक नृत्यांगना)

रानी खानम ने समाज की पुरानी बंदिशों को तोड़कर कथक नृत्य के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। बिहार में जन्मी रानी खानम ने पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज जैसे महान गुरुओं से नृत्य की शिक्षा ली। मुस्लिम समाज से होने के कारण शुरुआत में उन्हें कई तरह के विरोध का सामना करना पड़ा लेकिन वह पीछे नहीं हटीं।

उन्होंने 'आमद परफॉर्मिंग आर्ट्स सेंटर' की शुरुआत की। इस संस्था के जरिए वह डांस को सामाजिक बदलाव का जरिया बना रही हैं। उनकी कोरियोग्राफी में सूफीवाद और आध्यात्मिकता का गहरा प्रभाव दिखता है। वह अपने डांस के माध्यम से महिला समानता और समाज के कमजोर वर्गों की आवाज उठाती हैं।

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8. रुतबा शौकत (ओरिगेमी में विश्व रिकॉर्ड)

श्रीनगर की रहने वाली रुतबा शौकत ने खेल और कला दोनों ही क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा साबित की है। रुतबा राष्ट्रीय स्तर की मार्शल आर्ट खिलाड़ी हैं और उन्होंने कई मेडल जीते हैं। कोरोना महामारी के लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपने खाली समय में कागज मोड़ने की जापानी कला यानी ओरिगेमी सीखी।

कड़ी मेहनत और दो बार असफल होने के बाद रुतबा ने इतिहास रच दिया। उन्होंने एक घंटे में 250 कागज की नावें बनाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। रुतबा की कहानी हमें सिखाती है कि अगर आपके पास धैर्य है तो आप किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं।

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9. साफिया बानो (कोलकाता की पहली मुस्लिम महिला निकाह रजिस्ट्रार)

साफिया बानो ने समाज की पुरानी धारणाओं को बदलते हुए एक नया इतिहास रचा है। वह कोलकाता की पहली मुस्लिम महिला मैरिज रजिस्ट्रार बनी हैं। बंगाली साहित्य से ग्रेजुएशन करने वाली साफिया एक साधारण हाउसवाइफ थीं। उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर इस प्रशासनिक पद को हासिल किया जहां हमेशा पुरुषों का कब्जा रहता था।

उनके इस पद पर आने से समाज में महिलाओं के प्रति सोच बदली है। साफिया के रजिस्ट्रार बनने से मुस्लिम महिलाओं को अपने कानूनी और पारिवारिक मामलों में बात करने के लिए एक सुरक्षित और आरामदायक माहौल मिला है। उनका यह सफर महिलाओं की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

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10. साजिदा खान (देश की पहली प्रमुख महिला ऑडियो इंजीनियर)

हैदराबाद की साजिदा खान ने देश के तकनीकी और रचनात्मक क्षेत्र में एक नई राह दिखाई है। वह भारत की पहली प्रसिद्ध महिला ऑडियो इंजीनियर हैं। साजिदा ने कई भाषाओं की 60 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। उन्होंने साउंड डिजाइन, मिक्सिंग, डबिंग और पोस्ट प्रोडक्शन के काम में महारत हासिल की है।

जिस दौर में इस फील्ड में सिर्फ पुरुष काम करते थे उस समय साजिदा ने अपनी मेहनत से लोहा मनवाया। उन्हें उनके शानदार काम के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। फिल्मों के अलावा वह तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी काम कर रही हैं।

आवाज द वॉयस की 'परवाज' श्रृंखला में शामिल ये दस महिलाएं इस बात का सबूत हैं कि प्रतिभा किसी पहचान या बंदिश की मोहताज नहीं होती। चाहे सूफी पेंटिंग हो, दास्तानगोई हो, संगीत हो या फिर तकनीकी फील्ड जैसे ऑडियो इंजीनियरिंग, इन महिलाओं ने हर जगह अपनी सफलता का परचम लहराया है। इन सभी कलाकारों ने अपनी कला का उपयोग समाज को बेहतर बनाने और रूढ़ियों को तोड़ने के लिए किया है। इन मुस्लिम महिला कलाकारों का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।