अशफाक कायममखानी/जयपुर
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 10 वीं के नतीजों ने एक नई इबारत लिख दी है। यह परिणाम सिर्फ एक मार्कशीट नहीं बल्कि प्रदेश की मुस्लिम बेटियों के हौसलों की उड़ान का सबूत है। परीक्षा के आंकड़ों और छात्राओं के प्रदर्शन को देखें तो साफ है कि सूबे में मुस्लिम समाज की बच्चियां न केवल सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ रही हैं बल्कि बड़े पदों पर पहुंचने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
इस साल बोर्ड के इतिहास में पहली बार हुआ जब 12 वीं से पहले 10वीं का परिणाम जारी किया गया। 12 फरवरी से 28फरवरी के बीच हुई इस परीक्षा में करीब 10 लाख 68हजार से ज्यादा विद्यार्थी शामिल हुए थे। इसमें लड़कियों ने बाजी मारकर साबित कर दिया कि वे किसी से कम नहीं हैं। विशेष रूप से मुस्लिम समाज की हजारों बेटियों ने 95प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है।
शेखावाटी की बेटियों ने गाड़े झंडे
सीकर की 100 साल पुरानी इस्लामिया स्कूल और एक्सीलेंस गर्ल्स स्कूल की छात्राओं ने इस बार कमाल कर दिया है। सीकर की मायदा खान ने 98.17 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इसी तरह नोहर की अतिका खान ने 97.33 प्रतिशत और चूरू के रतननगर की शाहीन बानो ने 97.67 प्रतिशत अंक लाकर परिवार का नाम रोशन किया है।
सफलता की यह लिस्ट बहुत लंबी है। निम्बी गांव की अलवीरा ने 96.33 और चूड़ी गांव की मौसम बानू ने 96.67 प्रतिशत अंक पाए हैं। जाखल की आफरीन खान और सीकर की अलवीरा बानू दोनों ने 96.8 3प्रतिशत अंक हासिल किए। रोलसाहबसर की एंजल खान को 95.50 और छापरी की अलीसना को 95.17प्रतिशत अंक मिले हैं। सोफिया खान ने भी 95.17प्रतिशत अंक लाकर समाज का मान बढ़ाया है।
प्रशासनिक सेवाओं में भी बढ़ी भागीदारी
बेटियों की यह मेहनत सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं है। राजस्थान लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में भी मुस्लिम युवतियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। हाल ही में मावा गांव की किस्मत बानो कायमखानी ने राजस्थान पुलिस सेवा यानी आरपीएस में चयन पाकर मिसाल पेश की है। उन्होंने साबित किया कि मेहनत के दम पर लड़कियां लड़कों से भी आगे निकल सकती हैं।
इससे पहले असलम खान और फरहा हुसैन जैसी शख्सियतों ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जगह बनाकर रास्ता दिखाया था। वर्तमान में असलम खान दिल्ली में आईजी पुलिस के पद पर तैनात हैं। वहीं फरहा हुसैन जयपुर में आयकर विभाग में एडिशनल कमिश्नर के रूप में सेवाएं दे रही हैं। इन अफसरों की कामयाबी आज की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही है।
समाज की सोच में आ रहा बदलाव
शिक्षा के क्षेत्र में यह बदलाव इस बात का संकेत है कि अब अभिभावक अपनी बेटियों की तालीम को लेकर जागरूक हो रहे हैं। खास तौर पर शेखावाटी इलाके में संकुचित सोच का असर खत्म हो रहा है। यहां बेटे और बेटियों को पढ़ाई के समान अवसर मिल रहे हैं। यह सामाजिक बदलाव भविष्य में एक सशक्त और शिक्षित समाज की नींव रखेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बेटियों को विज्ञान और तकनीक जैसे विषयों में आगे बढ़ने का मौका मिले तो वे देश की सेवा में और बड़ा योगदान दे सकती हैं। जैसे ईरान में महिलाएं शिक्षा और शोध के क्षेत्र में दुनिया भर में नाम कमा रही हैं। ठीक वैसे ही राजस्थान की ये बेटियां भी अपनी मिट्टी का कर्ज चुकाने के लिए तैयार हैं।
बोर्ड का यह रिजल्ट समाज के लिए एक संदेश है। अब समय आ गया है कि बेटियों के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे और ज्यादा खोले जाएं। उनकी प्रतिभा को पंख दिए जाएं ताकि वे आने वाले समय में देश और दुनिया में राजस्थान का नाम ऊंचा कर सकें।